इस बीच, यूक्रेन के अधिकारियों ने आरोप लगाया कि रूस ने संघर्ष विराम के विपरीत कार्रवाई करते हुए दो शहरों पर बमबारी की, जिससे वहां से लोगों को निकालने में दिक्कत का सामना करना पड़ा।
मारियूपोल और वोलनोवाखा में संघर्ष विराम लागू नहीं होने से युद्ध खत्म करने के प्रयासों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। इसके साथ ही मात्र 10 दिन में करीब 14 लाख लोग यूक्रेन छोड़कर जा चुके हैं।
पुतिन ने यूक्रेन पर, लोगों के निकासी अभियान में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाया और यह भी दावा किया कि यूक्रेन का नेतृत्व देश के स्वतंत्र राष्ट्र के दर्जा के भविष्य पर सवाल उठा रहा है।
पुतिन ने कहा कि अगर ऐसा होता है तो इसके लिए पूरी तरह यूक्रेन का नेतृत्व जिम्मेदार होगा। इससे पहले रूस के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि वह दक्षिण पूर्व में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह मारियूपोल और पूर्व में स्थित वोलनोवाखा शहर से लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए रास्ता देने को सहमत है।
पिछले कई दिनों से इन दोनों शहरों में रूसी सेनाएं गोलाबारी कर रही हैं और बर्फीली सर्दी में वहां फंसे सैकड़ों लोगों के लिए अस्पताल, भोजन और पानी का संकट पैदा हो गया है। मारियूपोल के महापौर वादिम बॉयचेंको ने यूक्रेन के टीवी चैनल पर कहा कि हजारों लोग शहर से सुरक्षित बाहर निकलने के लिए एकत्र हुए हैं और जब बसें उन्हें लेकर रवाना हुईं तभी गोलाबारी शुरू हो गई।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) से आग्रह किया है कि उनके देश के ऊपर के वायु क्षेत्र को ‘उड़ान निषिद्ध क्षेत्र’ घोषित किया जाए।
नाटो का कहना है कि ऐसा ‘उड़ान निषिद्ध क्षेत्र’ घोषित करने से यूक्रेन के ऊपर सभी गैर अधिकृत विमानों पर पाबंदी लग जाएगी, जिससे परमाणु हथियारों से लैस रूस के साथ यूरोपीय देशों की बड़े स्तर पर जंग छिड़ जाएगी।
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