देश की खबरें | पंजाब : ‘मेरी सरकार’ के राज्यपाल के संदर्भ को लेकर आप, कांग्रेस के बीच तीखी नोकझोंक

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पंजाब विधानसभा में राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित के अभिभाषण के दौरान सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) और विपक्षी कांग्रेस के बीच उस वक्त तीखी नोकझोंक हुई जब नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने राज्यपाल से अपने अभिभाषण में ‘मेरी सरकार’ शब्द का इस्तेमाल न करने को कहा, क्योंकि राज्य सरकार उन्हें (राज्यपाल को) नहीं पहचानती है।

चंडीगढ़, तीन मार्च पंजाब विधानसभा में राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित के अभिभाषण के दौरान सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) और विपक्षी कांग्रेस के बीच उस वक्त तीखी नोकझोंक हुई जब नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने राज्यपाल से अपने अभिभाषण में ‘मेरी सरकार’ शब्द का इस्तेमाल न करने को कहा, क्योंकि राज्य सरकार उन्हें (राज्यपाल को) नहीं पहचानती है।

बजट सत्र के पहले दिन जब राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में ‘मेरी सरकार’ जैसे संदर्भ का इस्तेमाल किया तो कांग्रेस नेता बाजवा ने पुरोहित को टोकते हुए कहा कि उनसे ऐसा न करने का अनुरोध किया।

बाजवा ने आप सरकार और राजभवन के बीच हाल के दिनों में हुए विवाद का संदर्भ देते हुए पुरोहित से कहा, ‘‘यह सरकार आपको पहचानती नहीं है। उन्होंने (सरकार ने) आपके पूछे गये प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया है।’’

बाजवा ने यह भी कहा कि विधानसभा का बजट सत्र बुलाने में कथित तौर पर देरी के बाद आम आदमी पार्टी सरकार ने पुरोहित को "अभिलक्षित" कहा था।

इस पर राज्यपाल ने बाजवा से कहा कि वह उनकी बात से सहमति जताते हैं लेकिन इसे लेकर कोई ‘विवाद’ नहीं होना चाहिए।

पुरोहित ने बाजवा से अपनी सीट पर बैठने का अनुरोध करते हुए, ‘‘ठीक है, मैं केवल ‘सरकार’ शब्द का उपयोग करूंगा, ‘मेरी सरकार’ नहीं बोलूंगा।’’

पुरोहित ने इसके बाद बाजवा से कहा कि उन्होंने जिन घटनाओं का जिक्र किया है, वह सदन के बाहर हुई हैं, अंदर नहीं।

तब तक, आप और कांग्रेस सदस्यों के बीच गरमागरम बहस शुरू हो गई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी अपनी सीट से उठकर विरोध किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्यपाल को अपने संबोधन में ‘मेरी सरकार’ बोलना चाहिए।

पुरोहित ने अपने संबोधन के बाद कांग्रेस सदस्यों से कहा कि वे अभिभाषण के बाद इस पर चर्चा और बहस करें। पुरोहित ने कहा, "यह पहला दिन है और यह एक महत्वपूर्ण सत्र है।"

उन्होंने कहा कि अब (इस पर) कोई विवाद नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘अब मुझे अपना काम करने दीजिए। बेहतर होगा कि हम विवाद से बचें।’’ इसके बाद पुरोहित ने अपने अभिभाषण में केवल ‘सरकार’ शब्द का इस्तेमाल शुरू किया। इस पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी आपत्ति जताई।

पुरोहित ने उनसे कहा, ‘‘मैं पहली बार राज्यपाल नहीं हूं। मैं असम का राज्यपाल था, मैं मेघालय का राज्यपाल था और मैं तमिलनाडु का भी राज्यपाल था।’’

लेकिन मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि वह अपने संबोधन में ‘मेरी सरकार’ का इस्तेमाल अवश्य करें। मुख्यमंत्री के लगातार दबाव के बाद वह मान गए।

पुरोहित ने कहा, "क्योंकि कैबिनेट का फैसला है। वह (मान) भी उस हद तक सही हैं और मैं इससे बंधा हूं।" इसके बाद सत्ता पक्ष ने जोर-जोर से मेजें थपथपाईं।

जब राज्यपाल ने 36 स्कूल प्राचार्यों के पहले बैच को सिंगापुर भेजने की बात कही तो कांग्रेस सदस्य बाजवा फिर उठ खड़े हुए और राज्यपाल से पूछा कि क्या उन्हें राज्य सरकार से उनके सवालों का जवाब मिल गया है, इस पर पुरोहित ने कहा, "मुझे विश्वास है कि मैंने जो भी जानकारी मांगी है, वे (सरकार) मुझे सौंप देंगे।"

जब कांग्रेस विधायकों ने सदन से बर्हिगम का फैसला किया, तो पुरोहित ने उनसे कहा, "मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि आप सदन में मौजूद रहें और कम से कम मेरा भाषण सुनें।"

बाद में कांग्रेस के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।

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