देश की खबरें | पंजाब के मुख्यमंत्री ने कृषि अध्यादेश पर अकाली दल प्रमुख को केंद्र सरकार से अलग होने की चुनौती दी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. शिरोमणि अकाली दल (शिअद)की तरफ से कृषि अध्यादेश को लेकर चिंता जाहिर करने के एक दिन बाद रविवार को पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने विपक्षी दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को चुनौती देते हुए कहा कि अगर शिअद इस मामले में गंभीर है तो वह भाजपा नीत केंद्र सरकार से अलग होकर दिखाए।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

चंडीगढ, 13 सितंबर शिरोमणि अकाली दल (शिअद)की तरफ से कृषि अध्यादेश को लेकर चिंता जाहिर करने के एक दिन बाद रविवार को पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने विपक्षी दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को चुनौती देते हुए कहा कि अगर शिअद इस मामले में गंभीर है तो वह भाजपा नीत केंद्र सरकार से अलग होकर दिखाए।

मुख्यमंत्री ने कृषि अध्यादेश को लेकर बादल पर अचानक पलटी मारने का आरोप लगाते हुए इसे किसानों की 'आंखों में धूल झोंकने' का हथकंडा करार दिया।

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उन्होंने कहा कि केंद्र की सत्तारूढ़ सरकार के गठबंधन का हिस्सा होने के नाते शिअद अध्यादेश के पक्ष में था और उन्होंने इसे बिना शर्त समर्थन देने की बात कही थी।

अमरिंदर सिंह ने बादल पर हमलावर होते हुए अकाली दल पर इस मामले में ''दोहरे मापदंड'' अपनाने का आरोप लगाया।

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उल्लेखनीय है कि शिअद ने शनिवार को भाजपा नीत केंद्र सरकार से अपील की थी कि किसानों द्वारा व्यक्त की गई आशंकाओं को दूर किए बिना वह तीन कृषि अध्यादेशों को मंजूरी के लिए संसद में पेश नहीं करे।

शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की अध्यक्षता में पार्टी कोर कमेटी की हुई बैठक में यह फैसला लिया गया था।

पार्टी द्वारा जारी बयान में कहा गया था कि कोर कमेटी का मानना है कि यह उसकी जिम्मेदारी है कि ‘अन्नदाता’ की आशंकाओं को दूर करे और वह किसानों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को केंद्र सरकार के समक्ष रखने को प्रतिबद्ध है।

शिअद द्वारा कानून नहीं लागू करने की अपील पार्टी के पूर्व रुख से अलग है जिसमें उसने कहा था कि केंद्र ने उसे भरोसा दिया है कि इन अध्यादेशों का असर मौजूदा फसल खरीद नीति पर नहीं पड़ेगा।

किसानों ने आशंका जताई है कि इन अध्यादेशों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रणाली को खत्म करने का रास्ता साफ होगा और वे बड़े कॉरपोरेट घरानों की ‘दया’ के भरोसे रह जाएंगे। वे इन अध्यादेशों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

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