चंडीगढ़, तीन अप्रैल पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने सेना के एक कर्नल पर हमला मामले की जांच बृहस्पतिवार को चंडीगढ़ पुलिस को सौंप दी और साथ ही चार महीने के भीतर जांच पूरी करने के निर्देश भी जारी किए।
उच्च न्यायालय ने यह निर्देश सेना के कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाथ की याचिका पर दिया है। कर्नल बाथ ने पंजाब पुलिस के 12 कर्मियों पर पार्किंग विवाद को लेकर उन पर और उनके बेटे पर हमला करने का आरोप लगाया है तथा मामले की जांच सीबीआई अथवा किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने की मांग की है।
इस मामले की सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता के वकील दीपिंदर सिंह विर्क ने बताया कि न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ ने कर्नल से मारपीट का मामला चंडीगढ़ पुलिस को सौंप दिया है।
उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जाएगी।
वकील के मुताबिक अदालत ने यह भी कहा कि जांच दल में पंजाब कैडर का कोई भी पुलिस अधिकारी शामिल नहीं होगा। विर्क ने कहा कि जांच चार महीने के भीतर पूरी कर ली जाएगी।
कर्नल बाथ की पत्नी जसविंदर कौर बाथ ने कहा कि वह अदालत के आदेश से संतुष्ट हैं।
पंजाब पुलिस ने घटना की जांच के लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए.एस. राय की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल का गठन किया था।
कर्नल बाथ ने पंजाब पुलिस के 12 कर्मियों पर पार्किंग विवाद को लेकर उन पर और उनके बेटे पर हमला करने का आरोप लगाया है। उन्होंने सोमवार को उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
यह कथित घटना 13 और 14 मार्च की मध्य रात्रि को हुई, जब कर्नल बाथ और उनका बेटा पटियाला में सड़क किनारे एक ढाबे पर खाना खा रहे थे।
कर्नल बाथ ने आरोप लगाया है कि पंजाब पुलिस के चार निरीक्षक रैंक के अधिकारी और उनके सशस्त्र अधीनस्थों ने बिना किसी उकसावे के उन पर और उनके बेटे पर हमला किया, उनका आईडी कार्ड और मोबाइल फोन छीन लिया और उन्हें 'फर्जी मुठभेड़' की धमकी दी।
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