देश की खबरें | उपराज्यपाल को डीडीएमए का अध्यक्ष बनाने के खिलाफ उच्च न्यायालय में जनहित याचिका

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर उपराज्यपाल को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाने वाले कानून को चुनौती दी गई है। साथ ही उपराज्यपाल के उस फैसले को रद्द करने का अनुरोध किया गया है जिसमें उन्होंने अस्पतालों द्वारा राष्ट्रीय राजधानी के निवासियों का ही इलाज करने का आप सरकार का फैसला निरस्त कर दिया था।

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नयी दिल्ली, 18 जून दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर उपराज्यपाल को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाने वाले कानून को चुनौती दी गई है। साथ ही उपराज्यपाल के उस फैसले को रद्द करने का अनुरोध किया गया है जिसमें उन्होंने अस्पतालों द्वारा राष्ट्रीय राजधानी के निवासियों का ही इलाज करने का आप सरकार का फैसला निरस्त कर दिया था।

याचिका में दलील दी गई है कि दूसरे राज्यों के निवासियों को राष्ट्रीय राजधानी के संसाधनों का इस्तेमाल करने की अनुमति देकर उपराज्यपाल डीडीएमए के अध्यक्ष के तौर पर अपने अधिकार क्षेत्र से आगे चले गए।

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यह याचिका वकील धीरज कुमार सिंह ने दायर की है। याचिका में दावा गया है कि यहां अस्पतालों को केवल राष्ट्रीय राजधानी के निवासियों का ही इलाज करने का दिल्ली सरकार के सात जून के निर्देश को रद्द करने वाला उपराज्यपाल अनिल बैजल का आठ जून का आदेश आपदा प्रबंधन कानून (डीएमए) 2005 के प्रावधानों का उल्लंघन है।

याचिका में डीएमए के उस प्रावधान को रद्द करने का अनुरोध किया गया है जिसके तहत उपराज्यपाल को डीडीएमए का अध्यक्ष बनाया गया। याचिकाकर्ता ने कहा कि दूसरे राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में मुख्यमंत्री ऐसे निकाय का नेतृत्व करते हैं।

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याचिका में दलील दी गई है कि दो एक जैसे केंद्र शासित प्रदेशों के बीच इस तरह का ‘‘भेदभाव’’ नहीं हो सकता।

साथ ही याचिका में डीडीएमए को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह जान या आजीविका के नुकसान के लिए मेडिकल बीमा और अनुग्रह राशि के साथ ही दिल्ली के निवासियों के लिए निशुल्क या किफायती इलाज उपलब्ध कराए और उन अस्पतालों का नियंत्रण अपने हाथ में लें जो कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज के लिए मरीजों को लूट रहे हैं।

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