तिरुवनंतपुरम, 24 नवंबर केरल के सुदूर दक्षिणी हिस्से में राज्य सरकार के 7,500 करोड़ रुपये के महत्वाकांशी ‘विंझिजम सीपोर्ट’ का निर्माण यहां लातिन कैथोलिक आर्कडायोसिस के नेतृत्व में स्थानीय लोगों के 100 दिन से अधिक समय से चल रहे प्रदर्शन के कारण रुक गया है। इस बंदरगाह का निर्माण अडानी समूह कर रहा है।
परियोजना को जल्द से जल्द पूरी करने की इच्छा जताते हुए राज्य सरकार ने गिरजाघर के प्राधिकारियों से प्रदर्शन खत्म करने की अपील की है क्योंकि यह देश के औद्योगिक और आर्थिक क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए अहम परियोजना है।
सरकार ने दावा किया कि उसने प्रदर्शनकारियों की लगभग सभी मांगों को मान लिया है। हालांकि, प्रदर्शनकारी हटने के लिए तैयार नहीं हैं और उन्होंने आरोप लगाया कि इस परियोजना के लिए ग्रेनाइट पत्थरों के खनन के कारण मछुआरों, तटीय पारिस्थितिकी तंत्र और पश्चिमी घाटों की पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने उनकी मांगों पर कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया है।
‘विंझिजम इंटरनेशनल ट्रांसशिपमेंट डीपवाटर मल्टीपर्पज सीपोर्ट’ का निर्माण ‘लैंडलोर्ड मॉडल’ के तहत किया जा रहा है जिसमें इसका स्वामित्व सरकार के पास होगा लेकिन इसका संचालन अडानी समूह करेगा। इसकी अनुमानित लागत 7,525 करोड़ रुपये है।
परियोजना के निजी साझेदार ‘अडानी विंझिजम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड’ ने पांच दिसंबर 2015 को निर्माण कार्य शुरू किया था।
बंदरगाह प्राधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 70 प्रतिशत काम पूरा हो गया है लेकिन पिछले कुछ महीनों से प्रदर्शनों के कारण निर्माण रोक दिया गया है।
प्रदर्शनकारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक पादरी फादर यूजीन एच परेरा ने ‘पीटीआई-’ से कहा कि यह परियोजना उच्च कटाव वाले तटीय इलाके में बनायी जा रही है जिससे मछुआरा समुदाय पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने इस के असर का विशेषज्ञ समिति से अध्ययन कराने की मांग की है।
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