देश की खबरें | अभियोजकों के संगठन ने दिल्ली दंगा मामलों में एसपीपी की नियुक्ति को उच्च न्यायालय में चुनौती दी
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नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर अभियोजकों के एक संगठन ने फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से संबंधित मामलों में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सहित विशेष लोक अभियोजकों (एसपीपी) की नियुक्ति के आप सरकार के फैसले को सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी।
दिल्ली अभियोजक वेलफेयर एसोसिएशन (डीपीडब्ल्यए) की याचिका में एसपीपी की नियुक्ति से संबंधित दिल्ली सरकार के 24 जून की अधिसूचना को रद्द करने का आग्रह किया गया है। याचिका में दलील दी गयी है कि यह नियुक्ति दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत प्रदान की गई योजना का उल्लंघन है।
याचिका पर इसी सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है। इसमें अनुरोध किया गया है कि "निष्पक्षता के सिद्धांतों का सम्मान करते हुए" स्वतंत्र एसपीपी की नियुक्ति की जाए।
वकील कुशल कुमार के जरिए दायर याचिका में दावा किया गया है कि दिल्ली पुलिस की सिफारिशों पर एसजी सहित 11 एसपीपी की नियुक्ति "स्वतंत्र और निष्पक्ष सुनवाई सिद्धांतों से अलग हटने के समान है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 का हिस्सा है।’’
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अधिवक्ताओं आदित्य कपूर और मनिका गोस्वामी के माध्यम से भी दायर याचिका के अनुसार दिल्ली पुलिस द्वारा एसपीपी नियुक्त करने के प्रस्ताव को दिल्ली सरकार ने खारिज कर दिया था और उसने पैनल में शामिल अधिवक्ताओं से एसपीपी नियुक्त करने का फैसला किया था।
याचिका में कहा गया है कि पुलिस के संशोधित प्रस्ताव को भी दिल्ली सरकार ने खारिज कर दिया था और बाद में उपराज्यपाल ने इस मुद्दे में हस्तक्षेप किया और पुलिस द्वारा अनुशंसित नामों के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया।
याचिका में कहा गया है कि इस वजह से उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के बीच मतभेद हो गए और इस मुद्दे को राष्ट्रपति के पास भेजा गया जिन्होंने पुलिस द्वारा सुझाए गए नामों को मंजूरी दे दी।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद दिल्ली सरकार ने 24 जून को अधिसूचना जारी की।
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