गुवाहाटी, 17 जुलाई असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की उस हालिया घोषणा को लेकर विपक्षी दलों ने विरोध जताया है, जिसके अनुसार राज्य में बहुविवाह पर रोक लगाने के प्रावधान वाले विधेयक को सितंबर या अगले साल जनवरी में विधानसभा में पेश किया जाना प्रस्तावित है।
विपक्षी दलों का आरोप है कि बहुविवाह को समाप्त करने का प्रस्तावित विधेयक सांप्रदायिक और विभाजनकारी है, और विशेषकर ऐसे समय में इसे लाया जा रहा है, जब समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर विधि आयोग द्वारा सुझाव मांगे गए हैं।
शर्मा ने हाल ही में कहा था कि यूसीसी पर फैसला आने तक सरकार इसके एक खंड यानी बहुविवाह पर तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहती है।
एआईयूडीएफ के संगठन महासचिव और प्रवक्ता अमीनुल इस्लाम ने कहा कि भाजपा नेता और मुख्यमंत्री यूसीसी से संबंधित सांप्रदायिक टिप्पणियां कर रहे हैं, खासकर बहुविवाह के मुद्दे पर।
उन्होंने कहा, ‘‘वे इस प्रथा का पालन करने के लिए मुस्लिम समुदाय पर आरोप मढ़ रहे हैं लेकिन उनके बयान तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।’’
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के मुताबिक, देश की केवल 1.4 प्रतिशत आबादी ने बहुविवाह किया है और धर्म के आधार पर देखें तो बहुविवाह के मामले मुसलामनों में 1.9 प्रतिशत, ईसाइयों में 2.1 प्रतिशत और हिंदुओं में 3.1 प्रतिशत हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता मीरा बोरठाकुर ने ‘पीटीआई-’ से कहा कि राजनीतिक मकसद से किसी भी तरह का जबरन थोपा गया कदम किसी समाज में सफल नहीं हो सकता।
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