जरुरी जानकारी | सक्रिय मौद्रिक नीति कार्रवाई मुद्रास्फीति की उम्मीदों को सहारा दे सकती है: आरबीआई शोध

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सक्रिय रूप से दरों में बढ़ोतरी करके अपनी मौद्रिक नीति की मंशा और कार्रवाई की विश्वसनीयता को मजबूत कर सकता है। केंद्रीय बैंक के एक शोध पत्र में यह बात कही गई।

मुंबई, 17 जुलाई भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सक्रिय रूप से दरों में बढ़ोतरी करके अपनी मौद्रिक नीति की मंशा और कार्रवाई की विश्वसनीयता को मजबूत कर सकता है। केंद्रीय बैंक के एक शोध पत्र में यह बात कही गई।

गौरतलब है कि आरबीआई को एक तरफ आपूर्ति-आधारित मुद्रास्फीति का मुकाबला करना है, तो दूसरी ओर वृद्धि पर इसके नकारात्मक प्रभाव को भी काबू में रखना है।

शोध पत्र को आरबीआई के तीन विश्लेषकों ने लिखा है, जिसमें डिप्टी गवर्नर माइकल देवव्रत पात्रा शामिल हैं। वह मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्य हैं और केंद्रीय बैंक में मौद्रिक नीति विभाग के प्रमुख भी हैं।

इस लेख को जुलाई माह के आरबीआई बुलेटिन में प्रकाशित किया गया है।

शोध पत्र में कहा गया कि मौजूदा उच्च मुद्रास्फीति वैश्विक कारणों से है और आपूर्ति-पक्ष द्वारा संचालित है। इसमें आगे कहा गया कि मुद्रास्फीति को दरों में बढ़ोतरी जैसी मौद्रिक नीति कार्रवाइयों के बजाए राजकोषीय उपायों से बेहतर तरीके से निपटा जा सकता है।

जुलाई माह के आरबीआई बुलेटिन में प्रकाशित एक अन्य शोध पत्र में कहा गया कि मजबूत बाह्य स्थितियों के कारण भारत फेडरल रिजर्व द्वारा की गई मौद्रिक सख्ती से निपटने में सफल रहा।

फेडरल रिजर्व ने पिछले साल नवंबर में अपने संपत्ति खरीद कार्यक्रम को कम करने की घोषणा की थी। लेख में कहा गया कि इस घोषणा का प्रभाव भारतीय वित्तीय बाजारों में मध्यम रहा। ऐसा 2021 में देश की मजबूत बाह्य स्थिति के कारण हुआ।

यह शोध लेख विद्या कामटे और सौरभ घोष ने तैयार किया।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि दोनों लेख में व्यक्त विचार लेखकों के हैं और जरूरी नहीं कि वे आरबीआई के विचारों का प्रतिनिधित्व करते हों।

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