देश की खबरें | प्रधानमंत्री मोदी ने अनुच्छेद 370 को हटाकर मुखर्जी के बलिदान का सम्मान किया: धर्मेंद्र प्रधान

नयी दिल्ली, 23 जून केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान का सम्मान किया है।

अनुच्छेद 370 से जम्मू-कश्मीर को राज्य का विशेष दर्जा दिया गया था। हालांकि अब यह निरस्त किया जा चुका है।

भाजपा की दिल्ली इकाई ने मुखर्जी की पुण्यतिथि के अवसर पर यहां एस. पी. मुखर्जी पार्क में एक स्मृति सभा का आयोजन किया जिसमें प्रधान और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित पार्टी के कई नेता शामिल हुए और उन्होंने मुखर्जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

प्रधान ने कहा कि भाजपा और जनसंघ कार्यकर्ताओं के लिए मुखर्जी सिर्फ एक नेता और विचारक नहीं थे बल्कि एक विचार थे जो आज भी जीवित है।

उन्होंने कहा, ‘‘72 साल पहले उन्होंने जम्मू-कश्मीर में ‘‘एक देश में दो व्यवस्थाओं’’ की अवधारणा का विरोध किया था...। जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त किया तो यह उनके बलिदान का सम्मान था।’’

प्रधान ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश में विभिन्न विचारधारा वाले समूह थे जिसमें सांप्रदायिक, कम्युनिस्ट और राष्ट्रवादी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मुखर्जी अक्सर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की नीतियों से असहमत होते थे, इसीलिए उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने का विकल्प चुना था।

प्रधान ने कहा, ‘‘इस महत्वपूर्ण क्षण ने उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से हाथ मिलाने और जनसंघ के रूप में एक वैकल्पिक राजनीतिक विचारधारा स्थापित करने के लिए प्रेरित किया।’’

उन्होंने याद किया कि एक बार नेहरू ने मुखर्जी से कहा था, ‘‘मैं तुम्हें कुचल दूंगा’’ जिस पर मुखर्जी ने जवाब दिया था कि ‘‘मैं इस कुचलने वाली मानसिकता को ही कुचल दूंगा।’’

प्रधान ने इस बात पर जोर दिया कि भारत अब नक्सलवाद से मुक्त होने के करीब है और अब यह केवल कुछ जिलों तक सीमित है। उन्होंने कहा कि मोदी ने पिछले 10 वर्षों में दृढ़तापूर्वक राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता सुनिश्चित की है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘इस शासन की नींव डॉ. मुखर्जी के विचारों पर आधारित है।’’

प्रधान ने कहा कि मुखर्जी ने शिक्षा, , लघु उद्योग, राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और संविधान पर मौलिक और वैकल्पिक विचार प्रस्तुत किए।

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