देश की खबरें | प्रधानमंत्री मोदी इस महीने ब्रिटेन की यात्रा पर जा सकते हैं
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस महीने के अंत तक ब्रिटेन की यात्रा पर जा सकते हैं, जहां दोनों पक्ष ऐतिहासिक भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर कर सकते हैं और रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने के तरीकों पर विचार कर सकते हैं। राजनयिक सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
नयी दिल्ली, आठ जुलाई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस महीने के अंत तक ब्रिटेन की यात्रा पर जा सकते हैं, जहां दोनों पक्ष ऐतिहासिक भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर कर सकते हैं और रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने के तरीकों पर विचार कर सकते हैं। राजनयिक सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की ब्रिटेन यात्रा के लिए दोनों पक्ष जुलाई के अंत या अगस्त की शुरुआत में संभावित तारीखों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं।
इससे पहले संकेत मिले थे कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीअर स्टॉर्मर सबसे पहले भारत आएंगे, लेकिन अब पता चला है कि वह इस साल के अंत में भारत आ सकते हैं।
सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की लंदन यात्रा के दौरान भारत और ब्रिटेन द्वारा मुक्त व्यापार समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किये जाने की उम्मीद है।
भारत और ब्रिटेन ने मई में मुक्त व्यापार समझौते पर सहमति जताई थी, जिससे ब्रिटेन से भारत में निर्यात की जाने वाली वस्तुओं में 99 प्रतिशत शुल्क न लेना शामिल था, इससे ब्रिटेन की कंपनियों के लिए भारत को व्हिस्की, कार और अन्य उत्पादों का निर्यात करना आसान हो जाएगा, साथ ही समग्र व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
एफटीए (जिसे यूरोपीय संघ से बाहर आने के बाद ब्रिटेन का सबसे बड़ा समझौता माना जा रहा है) के साथ-साथ दोनों देशों ने ‘दोहरा योगदान समझौता’ भी किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों समझौतों को दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार, निवेश, विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने तथा भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के लिए एक ‘‘ऐतिहासिक मील का पत्थर’’ बताया था।
मोदी की ब्रिटेन यात्रा के दौरान दोनों पक्षों द्वारा रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार किये जाने की संभावना है।
दोनों पक्ष प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल (टीएसआई) के कार्यान्वयन पर भी विचार-विमर्श कर सकते हैं।
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