जरुरी जानकारी | खाद्य तेल-तिलहनों के दाम गिरे

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. मलेशिया एक्सचेंज में गिरावट और शिकॉगो एक्सचेंज में घट-बढ़ जारी रहने के बीच देश के थोक बाजार में सोमवार को अधिकांश खाद्य तेल-तिलहनों की कीमतों में गिरावट का रुख देखने को मिला। माल की कमी और मांग बढ़ने से मूंगफली तेल-तिलहन के भाव मजबूत पर बंद हुए।

नयी दिल्ली, 18 सितंबर मलेशिया एक्सचेंज में गिरावट और शिकॉगो एक्सचेंज में घट-बढ़ जारी रहने के बीच देश के थोक बाजार में सोमवार को अधिकांश खाद्य तेल-तिलहनों की कीमतों में गिरावट का रुख देखने को मिला। माल की कमी और मांग बढ़ने से मूंगफली तेल-तिलहन के भाव मजबूत पर बंद हुए।

सूत्रों ने कहा कि सहकारी संस्था नेफेड ने सरसों की बिक्री के लिए जो निविदा आमंत्रित की थी उसमें ऊंचे में बोली 5,398 रुपये क्विंटल और नीचे में 4,500 रुपये क्विंटल की बोली लगाई गई है जिसके बारे में कल फैसला आने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि दोनों ही बोलियां सरसों के 5,450 रुपये क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे है।

उन्होंने कहा कि आयात किया जाने वाला सोयाबीन डीगम तेल बंदरगाहों पर लागत के मुकाबले 8-9 प्रतिशत नीचे दाम पर बिक रहा है। इससे बाकी तेल-तिलहनों पर भी भारी दबाव है। बेशक थोक दाम में गिरावट है लेकिन खुदरा दाम मजबूत बने हुए हैं। इस मजबूती का कारण अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) अधिक निर्धारित किया जाना है। सरकार अगर खाद्य तेल उपभोक्ताओं को सस्ते में उपलब्ध कराना चाहती है, तो उसे एमआरपी को ठीक करावने की ओर ध्यान देना होगा या कोई पोर्टल बनाकर तेल कंपनियों को उस पर अपना एमआरपी का नियमित खुलासा करने का निर्देश देना होगा। इससे एमआरपी की निगरानी भी हो सकेगी और एमआरपी की जानकारी सार्वजनिक रूप से सभी को उपलब्ध होगी।

सूत्रों ने कहा कि आमजन के दिमाग में गलतफहमी है कि खाद्य तेल से रसोई का बजट बिगड़ता है क्योंकि खाद्य तेल की प्रति व्यक्ति खपत काफी कम है। लेकिन जो लोग महंगाई को लेकर चिंता जताते हैं, उन्हें मौजूदा समय में खुदरा में सस्ता आयातित तेल महंगा मिलने की स्थिति पर भी गौर करना चाहिये। अबतो सरकार को खुदरा दाम कम कराने पर अपना विशेष ध्यान देना चाहिये। मौजूदा स्थिति में तिलहन किसान, तेल मिलें, उपभोक्ता परेशानहाल हैं केवल विदेशी खाद्य तेल ब्रोकर फायदे में हैं।

सोमवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 5,550-5,600 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 7,540-7,590 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 18,200 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,660-2,945 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 10,200 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,740 -1,835 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,740 -1,850 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 9,675 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,625 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 7,950 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 7,700 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 8,250 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,000 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 8,150 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,080-5,175 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,845-4,940 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,015 रुपये प्रति क्विंटल।

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