देश की खबरें | प्रयागराज : ‘सिंभावली शुगर’ को ऋण देने वाले बैंकों की सीबीआई जांच का निर्देश
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. व्यवसायी और बैंकों के बीच मिलीभगत के एक चौंकाने वाले मामले में इलाहाबाद बैंक ने सात बैंकों की जांच कर यह पता लगाने का निर्देश दिया है कि पहले लिए गए ऋण के पुनर्भुगतान में चूक की जानकारी होने के बावजूद कैसे इन बैंकों ने एक कंपनी को विभिन्न मौकों पर ऋण मंजूर किए।
प्रयागराज (उप्र), 16 दिसंबर व्यवसायी और बैंकों के बीच मिलीभगत के एक चौंकाने वाले मामले में इलाहाबाद बैंक ने सात बैंकों की जांच कर यह पता लगाने का निर्देश दिया है कि पहले लिए गए ऋण के पुनर्भुगतान में चूक की जानकारी होने के बावजूद कैसे इन बैंकों ने एक कंपनी को विभिन्न मौकों पर ऋण मंजूर किए।
न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की पीठ ने कहा, “उत्तर प्रदेश में स्थित कंपनी ‘सिंभावली शुगर्स’ ने जानबूझकर करीब 1300 करोड़ रुपये की सार्वजनिक राशि का भुगतान नहीं किया।”
मेसर्स सिंभावली शुगर्स द्वारा दायर एक रिट याचिका का निस्तारण करते हुए अदालत ने कहा, “यहां बैंकों ने यह जानते हुए कि उस कंपनी ने पूर्व में अन्य बैंकों से लिया गया ऋण नहीं लौटाया है और वह पैसा एनपीए (गैर-निष्पादनकारी परिसंपत्तियां) घोषित किया जा चुका है, फिर भी कंपनी को करोड़ों रुपये ऋण दिया और यह संपूर्ण ऋण आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किए गए बगैर दिया गया।”
सिंभावली शुगर्स ने अपनी निपटान पेशकश भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) द्वारा खारिज किए जाने के निर्णय को रद्द करने का अनुरोध करते हुए यह याचिका दायर की थी। अदालत ने कहा कि इस कंपनी ने सात बैंकों के साथ बार बार समान कार्यप्रणाली अपनाई।
अदालत ने यह भी पाया कि इस कंपनी ने किसानों के गन्ना बकाये का भुगतान नहीं किया और आज भी पिछले पेराई सत्र का 279 करोड़ रुपये उस पर बकाया है। याचिकाकर्ता ने महज बैंकों के साथ धोखाधड़ी नहीं की है, बल्कि गन्ना किसानों का भी बकाया अपने पास रखा है और अब भी उनसे गन्ना ले रही है।
बैंकों को फटकार लगाते हुए अदालत ने कहा कि इनमें से कुछ बैंकों ने प्रवर्तकों की निजी गारंटी तक नहीं मांगी है। पांच करोड़ रुपये से ऊपर के धोखाधड़ी के मामलों की सूचना केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के बैंकिंग सुरक्षा एवं धोखाधड़ी प्रकोष्ठ को देना आवश्यक है, अदालत ने पाया कि इन बैंकों द्वारा दाखिल किसी भी हलफनामे में इस संबंध में कोई जिक्र तक नहीं है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने 12 दिसंबर, 2023 के अपने आदेश में सीबीआई को इनमें से प्रत्येक बैंक की जांच कर यह पता लगाने का निर्देश दिया कि कैसे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों का उल्लंघन कर ये ऋण मंजूर किए गए। ऋण मंजूर करने और बकाया राशि की वसूली के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाने वाले बैंक अधिकारियों की भी जांच का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा, “अगर सीबीआई को लगता है कि धन शोधन रोकथाम (पीएमएलए) अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के मुताबिक धन शोधन का मामला बनता है तो वह इस मामले को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सौंप सकती है।”
अदालत ने याचिकाकर्ता सिंभावली शुगर्स को इस जांच में शामिल होने और जांच में सहयोग करने का भी निर्देश दिया।
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