जरुरी जानकारी | बिहार सहित 21 राज्यों में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना शुरू, मछली निर्यात, किसानों की आय बढ़ेगी

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नयी दिल्ली, 10 सितंबर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को बिहार सहित देश के 21 राज्यों में 20,050 करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) की शुरुआत करते हुये कहा कि इससे मछली निर्यात दोगुना करने में मदद मिलेगी, रोजगार के अवसर और किसानों की आय बढ़ेगी।

एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से, प्रधान मंत्री ने मोबाइल ऐप ई-गोपाला के साथ-साथ बिहार में मत्स्य उत्पादन, डेयरी, पशुपालन और कृषि में अध्ययन और अनुसंधान से जुड़ी कई नई पहलों की भी शुरूआत कीं। राज्य में अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होने वाले है।

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मोदी ने कहा, ‘‘आज शुरु की गई इन सभी योजनाओं के पीछे का मकसद हमारे गांवों को सशक्त बनाना और 21 वीं सदी में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है।’’

उन्होंने कहा कि मत्स्य संपदा योजना की देश के 21 राज्यों में शुरुआत की जा रही है। इस योजना पर अगले चार से पांच साल में 20,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि 1,700 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर बृहस्पतिवार से काम शुरू हो गया है।

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मोदी ने कहा कि यह आजादी के बाद पहला मौका है कि मछली पालन क्षेत्र के लिए देश में इस तरह की कोई बड़ी योजना शुरू की गई है।

मोदी ने कहा कि इस योजना के तहत, बिहार के पटना, पूर्णिया, सीतामढ़ी, मधेपुरा, किशनगंज और समस्तीपुर में कई सुविधा केन्द्रों का उद्घाटन किया गया है।

उन्होंने कहा कि पीएमएमएसवाई नए बुनियादी ढांचे, आधुनिक उपकरणों और मछली उत्पादकों के लिए नए बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित करेगा और खेती के अलावा किसानों की आय बढ़ाने के मौके पैदा करेगा। उन्होंने कहा कि अगले चार से पांच वर्षों में मछली निर्यात दोगुना होने की उम्मीद है।

पीएमएमएसवाई, 20,050 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के साथ, वर्ष 2020-21 से वर्ष 2024-25 तक आत्मानिभर भारत पैकेज के हिस्से के रूप में लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य मछली उत्पादन में अतिरिक्त 70 लाख टन की वृद्धि करना और वर्ष 2024-25 तक मछली निर्यात से होने वाली आय को बढ़ाकर एक लाख करोड़ रुपये करना है।

मोदी ने कहा कि मछलीपालन क्षेत्र की क्षमता का दोहन करने के लिए, एक नया मंत्रालय बनाया गया है जबकि मिशन क्लीन गंगा और मिशन डॉल्फिन जैसी अन्य योजनाओं से भी मत्स्यपालन क्षेत्र को लाभ होगा।

मोदी ने कहा कि मत्स्य पालन के अलावा सरकार नवाचार और नए उत्पादों के माध्यम से डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा दे रही है ताकि किसानों और पशुपालकों को अधिक आय हो।

उन्होंने पशुपालन में 'आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन)' तकनीक को बढ़ावा देने और मवेशियों की देखभाल के बारे में वैज्ञानिक जानकारी का प्रसार करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘आमतौर पर एक गाय एक साल में एक बछड़े को जन्म देती है। लेकिन आईवीएफ तकनीक की मदद से एक साल में कई बछड़े हो सकते हैं। हमारा लक्ष्य इस तकनीक को हर गांव तक पहुंचाना है।’’

मोबाइल ऐप ई-गोपाला के बारे में उन्होंने कहा कि ये ऑनलाइन प्लेटफॉर्म - जो मवेशियों की देखभाल से संबंधित सभी जानकारी यानी उत्पादकता से लेकर उसके स्वास्थ्य और आहार तक की जानकारी प्रदान करता है, किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले पशुधन का चयन करने और बिचौलियों से मुक्ति पाने में मदद करेगा।

पशुधन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए, मोदी ने कहा कि खुरपका और मुंहपका की बीमारी, और ब्रुसेलोसिस के खिलाफ 50 करोड़ से अधिक पशुओं का टीकाकरण करने के लिए बृहस्पतिवार को एक मुफ्त टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है। पशुओं को बेहतर चारे के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत प्रावधान भी किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि देश में बेहतर देशी नस्लों को विकसित करने के लिए मिशन गोकुल चल रहा है। एक देशव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम एक साल पहले शुरू किया गया था और इसका पहला चरण बृहस्पतिवार को पूरा हुआ। मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत पूर्णिया, पटना, बरौनी में आधुनिक सुविधाओं के साथ राज्य में डेयरी क्षेत्र को मजबूत किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘पूर्णिया में बनाया गया केंद्र भारत के सबसे बड़े केंद्रों में से एक है। इससे न केवल बिहार बल्कि पूर्वी भारत का एक बड़ा हिस्सा लाभान्वित होगा।’’ उन्होंने कहा कि यह केंद्र बिहार की बछौर ’और ‘रेड पूर्णिया’ जैसी स्वदेशी नस्लों के विकास और संरक्षण को बढ़ावा देगा।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए, मोदी ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों और अनुसंधान केंद्रों को गांवों के पास स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने विशेष बुनियादी ढांचा तैयार करने और भंडारण, कोल्ड स्टोरेज और अन्य सुविधाओं के विकास के लिए सहकारी समूहों (एफपीओ) को सहयोग प्रदान करने के लिए एक लाख करोड़ रुपये के कृषि आधारभूत संरचना विकास कोष की स्थापना की है।

कोविड-19 के दौरान किसानों के प्रयासों की सराहना करते हुए, मोदी ने कहा, ‘‘यह हमारे गांवों की ताकत है कि कोरोना महामारी के बावजूद, बिना किसी कमी के अनाज, फल, सब्जियां और दूध का मंडियों में आना और डेयरियों तक पहुंचना जारी रहा। इतना ही नहीं, डेयरी उद्योग ने कठिन परिस्थिति के बावजूद रिकॉर्ड खरीदारी भी की है।’’

मोदी ने कहा कि किसानों का समर्थन करने के लिए सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) के तहत देशभर में 10 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में धन हस्तांतरित किया है। बिहार में लगभग 75 लाख किसानों को इसके तहत अब तक 6,000 करोड़ रुपये उनके खातों में डाले जा चुके हैं।

इससे पहले, केंद्रीय पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि पीएमएमएसवाई बिहार और अन्य राज्यों में मछली पालन क्षेत्र के विकास में बहुत मदद करेगा।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में कृषि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 89 प्रतिशत आबादी गाँवों में रहती है जबकि 76 प्रतिशत लोग कृषि और संबद्ध क्षेत्रों पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि उनके शासन के दौरान मांस, दूध और अंडे का उत्पादन बढ़ा है और अन्य राज्यों पर निर्भरता काफी कम हो गई है।

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि राज्य में पशुपालन मंत्रालय चारा घोटाले के लिए जाना जाता है और कोई भी इस विभाग का मंत्री नहीं बनना चाहता है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार सरकार ने इस मंत्रालय को एक जीवनदान दिया है और 2020-21 में यह आवंटन 15 गुना बढ़कर 1,178 करोड़ रुपये हो गया है, जो 2005-06 में 72 करोड़ रुपये था।

राजेश

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