विदेश की खबरें | श्रीलंका के शक्तिशाली बौद्ध धर्मगुरुओं ने दी सरकार विरोधी फरमान जारी करने की धमकी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. श्रीलंका के शक्तिशाली बौद्ध धर्मगुरुओं ने राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ एक फरमान जारी करने की धमकी दी है। बौद्ध धर्मगुरुओं ने देश में चल रहे राजनीतिक और आर्थिक संकट के समाधान के लिए अंतरिम सरकार के गठन का रास्ता साफ करने में विफल रहने के लिये उसके खिलाफ शनिवार को विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया।

कोलंबो, 30 अप्रैल श्रीलंका के शक्तिशाली बौद्ध धर्मगुरुओं ने राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ एक फरमान जारी करने की धमकी दी है। बौद्ध धर्मगुरुओं ने देश में चल रहे राजनीतिक और आर्थिक संकट के समाधान के लिए अंतरिम सरकार के गठन का रास्ता साफ करने में विफल रहने के लिये उसके खिलाफ शनिवार को विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया।

बीते 9 अप्रैल से हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे हैं, क्योंकि सरकार के पास महत्वपूर्ण आयात के लिए पैसे नहीं हैं, आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं और ईंधन, दवाओं और बिजली की आपूर्ति में भारी कमी है।

गौरतलब है कि हाल ही में, बौद्ध धर्मगुरुओं, नागरिक संस्थाओं और व्यापार मंडलों ने मुख्य रूप से बौद्ध राष्ट्र में एक अंतरिम सरकार के गठन की मांग की है।

अब बौद्ध धर्मगुरुओं ने अंतरिम सरकार के गठन का रास्ता साफ करने के लिए प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के इस्तीफे के लिए दबाव बनाने का फैसला किया है। करीब 1,000 भिक्षु शनिवार शाम को विरोध मार्च निकालने वाले हैं, जिसमें सरकार से 4 अप्रैल को राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को लिखे अपने पत्र के अनुसार कार्रवाई करने की मांग करेंगे।

एक वरिष्ठ भिक्षु अगलकदा सिरिसुमना ने पत्रकारों से कहा कि शनिवार को संसद में प्रतिनिधित्व रखने वाले सभी दलों के साथ होने वाली एक बैठक में, वे कार्रवाई करने में विफल रहने के लिए सरकार के खिलाफ एक फरमान जारी करेंगे।

उन्होंने कहा, “हमने प्रधानमंत्री और सरकार के इस्तीफे तथा एक वर्ष की अवधि के लिए एक अंतरिम सरकार गठित करने के लिए कहा है। उस अवधि के दौरान सरकार को एक विशेष पैनल द्वारा निर्देशित किया जाएगा।''

उन्होंने कहा कि उन्हें सरकार की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।

चार बौद्ध चैप्टर - मालवथु, असगिरी, अमरपुरा और रामन्या- श्रीलंका के राजनीतिक परिदृश्य में बहुत अधिक महत्व रखते हैं।

राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे पर सत्तारूढ़ श्रीलंका पोडुजाना पेरामुना (एसएलपीपी) गठबंधन के एक असंतुष्ट समूह की ओर से भी एक अंतरिम सरकार गठित करने के लिये दबाव है।

हालांकि, 76 वर्षीय प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि कोई भी अंतरिम सरकार केवल उनके नेतृत्व में ही बननी चाहिए।

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