देश की खबरें | चंद्रयान-3 के चांद पर उतरने से पहले पूजा, उत्सव का दौर जारी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारत के चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के लिए बुधवार शाम को ओडिशा में कई जगहों पर पूजा एवं यज्ञ का आयोजन किया गया।

भुवनेश्वर, 23 अगस्त भारत के चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के लिए बुधवार शाम को ओडिशा में कई जगहों पर पूजा एवं यज्ञ का आयोजन किया गया।

आम जनता से लेकर विभिन्न संगठनों और धार्मिक संस्थाओं के लोग इस अवसर की तैयारियों में व्यस्त दिखे।

भगवान जगन्नाथ मंदिर में पुजारियों का एक समूह 12वीं सदी के मंदिर के सिंह द्वार के सामने इकट्ठा हुआ और चंद्र मिशन की सफलता के लिए प्रार्थना करते हुए उन्होंने दीया जलाया।

जगन्नाथ संस्कृति के शोधकर्ता भास्कर मिश्रा ने कहा, ‘‘चूंकि भगवान जगन्नाथ को ब्रह्मांड के स्वामी के रूप में पूजा जाता है, इसलिए उनका आशीर्वाद भारत के चंद्र मिशन के लिए सबसे आवश्यक है। वेदों के अनुसार, सभी ग्रह भगवान जगन्नाथ के निर्देशों के अनुसार सूर्य के चारों ओर घूमते हैं।’’

वैदिक गणित के विशेषज्ञ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि कई पुराणों में चंद्रमा के बारे में उल्लेख किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे प्राचीन संत चन्द्रमा को भली-भांति समझते थे इसलिए, अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को चंद्र मिशन पर जाते समय पुराणों का भी संदर्भ लेना चाहिए।’’

उन्होंने चंद्र मिशन की सफलता की कामना भी की।

भुवनेश्वर में भी लोगों में उत्साह दिखा और यहां कलिंगा स्टेडियम के निकट विश्वकर्मा मंदिर के पास बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। उन्होंने चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के लिए यज्ञ और हवन किया।

कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस के छात्रों ने संस्थान के परिसर में यज्ञ किया। राज्य भर के कई स्कूलों ने भी इस दिन को त्योहार की तरह मनाया।

राज्य के सैकड़ों सरस्वती शिशु विद्या मंदिर स्कूलों में भी पूजा-अर्चना की गई।

जाजपुर जिले के कैमा गांव स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर की प्रधानाध्यापिका रीतारानी स्वैन ने कहा, ‘‘हम मिशन को लेकर वास्तव में उत्साहित हैं। हम ईश्वर से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के लिए भारत के मिशन को आशीर्वाद देने की प्रार्थना करते हैं।’’

सुंदरगढ़ जिले में महिलाओं ने भगवान शिव की पूजा की और चंद्रमा की सतह पर लैंडर मॉड्यूल की सफल लैंडिंग के लिए नीलकंठेश्वर मंदिर में ‘शुभ कलश’ स्थापित किया।

पुरी में सुदर्शन रेत कला संस्थान के छात्रों ने पुरी समुद्र तट पर चंद्रयान -3 को दर्शाते हुए रेत पर एक कलाकृति बनाई।

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