देश की खबरें | नाबालिग को एसिड पिलाने के मामले में लगता है पुलिस आरोपी को बचा रही है: उच्च न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. झारखंड उच्च न्यायालय ने हजारीबाग में एक नाबालिग छात्रा को एसिड पिलाने के मामले में पुलिस की धीमी जांच से नाराज होकर शुक्रवार को कहा कि ऐसा लगता है कि इस मामले में पुलिस आरोपियों को बचा रही है। साथ ही न्यायालय ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को मामले में शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिये हैं।

रांची, 10 जुलाई झारखंड उच्च न्यायालय ने हजारीबाग में एक नाबालिग छात्रा को एसिड पिलाने के मामले में पुलिस की धीमी जांच से नाराज होकर शुक्रवार को कहा कि ऐसा लगता है कि इस मामले में पुलिस आरोपियों को बचा रही है। साथ ही न्यायालय ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को मामले में शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिये हैं।

झारखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश डॉ. रविरंजन एवं सुजीत नारायण प्रसाद की पीठ ने शुक्रवार को हजारीबाग में एक नाबालिग छात्रा को एसिड पिलाने के मामले की पुलिस जांच पर गहरी नाराजगी जतायी और राज्य के डीजीपी को शपथपत्र दाखिल कर जांच की अद्यतन स्थिति बताने को कहा है।

यह भी पढ़े | WHO ने की एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती धारावी की तारीफ, कहा- कोरोना का ट्रांसमिशन चेन तोड़ पेश किया मॉडल.

पीठ ने कहा कि पुलिस इस मामले के आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है लेकिन उसकी पॉलीग्राफी टेस्ट पर मंतव्य मांग रही है। इससे प्रतीत होता है कि पुलिस आरोपी को बचाने का

प्रयास कर रही है। अदालत ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को अगले सप्ताह नया शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया।

यह भी पढ़े | केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने एम्स ट्रामा सेंटर के सुपरिंटेंडेंट को हटाने का आदेश दिया.

पिछले वर्ष दिसंबर में हजारीबाग की एक नाबालिग स्कूली छात्रा को कुछ लोगों ने एसिड पिला दिया था। छात्रा का पटना एम्स और रांची के रिम्स में इलाज चल रहा था। एसिड पिलाने के कारण वह दो माह तक कुछ बोल नहीं पा रही थी। अखबारों खबर प्रकाशित होने के बाद अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने इस पर संज्ञान लिया और मामले को जनहित याचिका में बदल दिया था।

19 जून को न्यायालय ने इस मामले में सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। शुक्रवार को पुलिस विभाग की ओर से जो शपथपत्र दाखिल किया गया उसमें कोई ठोस जानकारी नहीं थी। अभियुक्त को फरार बताया गया। शपथपत्र में कहा गया था कि आरोपी की पॉ़लीग्राफी टेस्ट कराने के लिए मंतव्य लिया जाएगा।

, इन्दु ,

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\