नयी दिल्ली, 19 जनवरी कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भाजपा सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों पर अपनी ‘चुप्पी’ तोड़नी चाहिए। इसके साथ ही पार्टी ने सवाल किया कि इस मामले में शामिल लोगों के इस्तीफे अब तक क्यों नहीं लिए गए।
पहलवान विनेश फोगाट ने बुधवार को आरोप लगाया था कि भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष सिंह वर्षों से महिला पहलवानों का यौन शोषण कर रहे हैं। इस आरोप को खेल प्रशासक ने सिरे से खारिज कर दिया।
इस मुद्दे पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, जयराम रमेश और पवन खेड़ा ने भी अपनी बात कही।
प्रियंका ने ट्वीट किया, “हमारे खिलाड़ी देश की शान हैं। विश्व स्तर पर अपने प्रदर्शन से वे देश का मान बढ़ाते हैं।”
उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने कुश्ती संघ और उसके अध्यक्ष के खिलाफ उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं तथा उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए।
कांग्रेस महासचिव व संचार प्रभारी जयराम रमेश ने एक ट्वीट में कहा, “कुलदीप सेंगर, चिन्मयानंद, बाप-बेटे विनोद आर्य-पुलकित आर्य...और अब यह नया मामला। बेटियों पर अत्याचार करने वाले भाजपा नेताओं की फेहरिस्त अंतहीन है।”
उन्होंने ट्विटर पर कहा, “क्या ‘बेटी बचाओ’ बेटियों को भाजपा नेताओं से बचाने की चेतावनी थी? प्रधानमंत्री जी, जवाब दीजिए।”
उन्होंने पूछा, “प्रधानमंत्री जी, बेटियों पर अत्याचार करने वाले सारे भाजपाई ही क्यों होते हैं?”
रमेश ने कहा, “कल आपने कहा कि देश में पिछले आठ साल में खेलों के लिए बेहतर माहौल बना है। क्या यही है ‘बेहतर माहौल’ जिसमें देश का नाम रोशन करने वाली बेटियां भी सुरक्षित नहीं हैं?”
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से एक खेल कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मोदी ने बुधवार को कहा था, “कितने ही सामर्थ्यवान युवा, कितनी ही प्रतिभाएं मैदान से दूर रह गयीं। मगर पिछले आठ वर्षों में देश ने इस पुरानी सोच को पीछे छोड़ दिया है। खेलों के लिए एक बेहतर वातावरण बनाने का काम किया गया है इसलिए अब ज्यादा बच्चे और नौजवान खेल को करियर विकल्प के तौर पर देखने लगे हैं।”
कांग्रेस महासचिव व हरियाणा से पार्टी की वरिष्ठ नेता कुमारी शैलजा ने कहा कि सरकार का ‘बेटी बचाओ’ कार्यक्रम खोखला साबित हो रहा है।
किसी का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा, ‘‘पहलवान धरना दे रहे हैं। वह वरिष्ठ महिला मंत्री कहां हैं, जब ऐसी गंभीर घटना सामने आयी है, तो वह कहां हैं।’’
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को सामने आना चाहिए था और कहना चाहिए कि हमारी बेटियों के खिलाफ ऐसे व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शैलजा ने कहा कि सभी महिलाएं, लड़कियां और हमारे खिलाड़ी जवाब मांग रहे हैं और आरोप लगाया कि तथ्यों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि सिंह का इस्तीफा बुधवार को ही आ जाना चाहिए था।
उन्होंने कहा, “वह पहला कदम होना चाहिए था। कोई और संवेदनशील सरकार होती तो यह फौरन हो जाना चाहिए था। फिर, प्रधानमंत्री को एक बयान जारी करना चाहिए और इन परिवारों के विश्वास को बहाल करना चाहिए। हमारे परिवार रूढ़िवादी हैं, बच्चों को प्रशिक्षण, देश के लिए लड़ने और पदक जीतने के लिये भेजना एक मुश्किल विकल्प है।”
खेड़ा ने कहा, “खेल मंत्री (अनुराग ठाकुर) को बोलना चाहिए। प्रधानमंत्री को बोलना चाहिए, इस्तीफे होने चाहिए, और प्रमुखों को तुरंत हटाया जाना चाहिए। यह बहुत पहले हो जाना चाहिए था, 24 घंटे बहुत लंबा समय है। जो कुछ हुआ है, उससे कहीं ज्यादा चौंकाने वाली चुप्पी है।”
खेड़ा ने आरोप लगाया कि ऐसे कई उदाहरण हैं जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने महिलाओं पर अत्याचार करने वालों को संरक्षण दिया।
विश्व चैंपियनशिप की पदक विजेता और ओलंपियन विनेश फोगाट का तोक्यो ओलंपिक खेलों के बाद से ही डब्ल्यूएफआई से टकराव चल रहा है। फोगाट ने यह भी दावा किया कि लखनऊ में राष्ट्रीय शिविर में कई कोच ने भी महिला पहलवानों का शोषण किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिविर में कुछ महिलाएं हैं जो डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष के कहने पर पहलवानों से संपर्क करती हैं।
इस 28 साल की पहलवान ने हालांकि स्पष्ट किया कि उन्होंने खुद कभी इस तरह के शोषण का सामना नहीं किया है लेकिन दावा किया कि बुधवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुए ‘धरने’ में “एक पीड़ित” मौजूद थी।
रियो ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक, विश्व चैम्पियनशिप पदक विजेता सरिता मोर, संगीता फोगाट, सत्यव्रत कादियान, जितेंद्र किन्हा और राष्ट्रमंडल खेल पदक विजेता सुमित मलिक ‘जंतर-मंतर’ पर धरने पर बैठे 30 पहलवानों में शामिल थे।
सिंह (66) फरवरी 2019 में लगातार तीसरी बार डब्ल्यूएफआई के निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। आरोपों पर संज्ञान लेते हुए खेल मंत्रालय ने डब्ल्यूएफआई से स्पष्टीकरण मांगा है और उसे “लगाए गए आरोपों पर अगले 72 घंटों के भीतर जवाब देने” का निर्देश दिया है।
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