नयी दिल्ली, छह अगस्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारी मदन दास देवी को रविवार को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनकी जीवन यात्रा इस बात को दर्शाती है कि ‘‘जब खुद को पीछे रखते हुए सामूहिकता को प्रमुखता दी जाती है तो चमत्कार होते हैं।’’
संघ के वयोवृद्ध नेता मदन दास देवी का बेंगलुरु में 24 जुलाई को निधन हो गया था। उन्होंने संघ के संयुक्त सचिव के पद पर कार्य किया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अपनी वेबसाइट में लिखा, ‘‘कुछ दिन पहले जब हमने मदन दास देवी को खोया था तब मैं और लाखों कार्यकर्ता बेहद दुखी थे।’’
उन्होंने कहा कि मदन दास जैसी प्रभावशाली शख्सियत अब साथ नहीं है, इस बात को स्वीकार करना मुश्किल है।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘लेकिन हमें इस बात का सुकून है कि उनका प्रभाव हमेशा रहेगा। उनकी शिक्षा और उनके सिद्धांत प्रेरणास्रोत बनेंगे और आगे की यात्रा में मार्गदर्शन देंगे।’’
मोदी ने कहा, ‘‘मुझे मदन दास जी के साथ कई वर्ष निकटता से काम करने का मौका मिला। मैंने उनकी सादगी तथा मृदुभाषी स्वभाव को काफी निकटता से महसूस किया है। वह सर्वोत्कृष्ट संगठनात्मक व्यक्ति थे और मैंने भी संगठन में काम करते हुए काफी समय बिताया।’’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘तो इस प्रकार यह स्वाभाविक था कि संगठनात्मक विकास और कार्यकर्ताओं से जुड़े पहलू हमारी बातचीत का हिस्सा रहते थे।’’
मोदी ने कहा, ‘‘इसी प्रकार की एक चर्चा के दौरान मैंने उनसे पूछा कि वह मूल रूप से कहां से हैं। उन्होंने मुझे बताया कि वैसे तो वह महाराष्ट्र के सोलापुर के निकट के एक गांव से हैं, लेकिन उनके पूर्वज गुजरात से थे। हालांकि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि वह किस स्थान से हैं। मैंने उन्हें बताया कि मेरे एक शिक्षक का पदनाम देवी है और वह शिक्षक विसनगर से थे। बाद में वह विसनगर और वडनगर भी गए। हमारी गुजराती में भी बातचीत हुई।’’
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