देश की खबरें | ‘पीएम केयर्स फंड’ की जांच कराई जाए : उद्धव ठाकरे
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कथित कोविड-19 अस्पताल घोटाले में उनकी पार्टी के कुछ करीबी लोगों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को लेकर पलटवार करते हुए शनिवार को कहा कि ‘पीएम केयर्स फंड’ की भी जांच की जानी चाहिए।
मुंबई, 24 जून शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कथित कोविड-19 अस्पताल घोटाले में उनकी पार्टी के कुछ करीबी लोगों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को लेकर पलटवार करते हुए शनिवार को कहा कि ‘पीएम केयर्स फंड’ की भी जांच की जानी चाहिए।
ठाकरे ने नागपुर, पिंपरी-चिंचवड और पुणे के नगर निकाय के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और गुजरात सरकार की भी जांच कराने की मांग की, जिनका नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कर रही है। ठाकरे ने ठाणे नगर निकाय की भी जांच कराने की मांग की, जिसपर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का नियंत्रण था।
इन निकायों का कार्यकाल वर्ष 2022 के पूर्वार्द्ध में समाप्त हो गया था, लेकिन कोरोना वायरस महामारी की वजह से चुनाव नहीं कराए गए हैं।
पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए ठाकरे ने सरकार को कोविड महामारी के दौरान बृह्नमुंबई महानगरपालिका (बीएससी) के कामकाज की जांच कराने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि उस वक्त महामारी अधिनियम और आपदा प्रबंधन कानून लागू थे और खतरनाक स्थिति के मद्देनजर नियम कायदों से परे जाकर लोगों की जान बचाने की आवश्यकता थी।
पिछले साल फरवरी में कार्यकाल समाप्त होने तक बीएमसी पर अविभाजित शिवसेना का नियंत्रण था।
ठाकरे ने कहा, ‘‘हम किसी जांच से नहीं डरते और अगर आप (सरकार) जांच कराना चाहते हैं, तो आपको ठाणे नगर निगम, पिंपरी-चिंचवड, पुणे और नागपुर नगर निकायों की भी जांच करानी चाहिए।’’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा,‘‘पीएम केयर्स फंड की भी जांच कराई जानी चाहिए। पीएम केयर्स फंड किसी जांच के दायरे में नहीं आता। लाखों और करोड़ों रुपये एकत्र किए गए। कई वेंटिलेटर सही से काम नहीं कर रहे थे। हम भी जांच कराएंगे।’’
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपातकालीन स्थिति राहत कोष (पीएम केयर्स फंड) की स्थापना वर्ष 2020 में कोविड 19 महामारी से निपटने के लिए एक परमार्थ न्यास के तौर पर की गई थी।
इस कोष के अध्यक्ष प्रधानमंत्री हैं, जबकि रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री इसके सदस्य हैं।
ठाकरे ने कहा कि महामारी के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने वाले मुख्यमंत्रियों की सूची में वह शीर्ष स्थान पर थे, जिसकी वजह से भाजपा के ‘पेट में दर्द’ हो रहा है, क्योंकि उसका कोई भी नेता इस रैंकिंग में अपना स्थान नहीं बना पाया।
ठाकरे 2019 के अंत में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने और जून 2022 तक इस पद पर रहे, जबकि पूरे देश में कोविड-19 महामारी का प्रकोप मार्च 2020 से बढ़ना शुरू हुआ।
उन्होंने दावा किया, ‘‘आप (भाजपा नीत सरकार) उद्धव ठाकरे को खलनायक बना रहे हैं। जनता तय करेगी कि वह नायक है या खलनायक, लेकिन आप ‘नालायक’ हैं।
ठाकरे ने कहा कि पूरी दुनिया महानगर में महामारी से निपटने को लेकर ‘मुंबई मॉडल’ की प्रशंसा कर रही थी, जबकि विपक्षी (स्पष्ट रूप से भाजपा के संदर्भ में) बदनाम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मुंबई को लूटा जा रहा है और शिवसेना (यूबीटी) द्वारा अनियमितताओं का खुलासा करने की वजह से कोविड घोटाले के आरोप सामने आए हैं।
गौरतलब है कि एकनाथ शिंदे नीत सरकार ने नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में कथित तौर पर 12 हजार करोड़ रुपये की अनियमितता का संकेत मिलने के बाद मुंबई पुलिस आयुक्त के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।
वहीं, ठाकरे के बेटे और पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे बीएमसी में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जुलाई को होने वाले विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र एकमात्र राज्य था, जिसने कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए ‘फील्ड केयर’ अस्पताल की स्थापना की थी।
उन्होंने सवाल किया, ‘‘गुजरात और उत्तर प्रदेश में क्या हुआ?’’दोनों भाजपा शासित राज्य महामारी के दौरान संक्रमितों की संख्या को लेकर सुर्खियों में रहे थे और उत्तर प्रदेश में कोविड से मरने वाले लोगों के शव कथित तौर पर गंगा में बहाए जाने का आरोप लगा था।
ठाकरे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अधिकारियों की समिति गठित की थी और उन्हें महामारी के दौरान सामान्य मसौदा समझौते से परे जाकर उपकरणों की खरीद करने की अनुमति दी गई थी।
भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज करते हुए ठाकरे ने भाजपा को क्रूर करार दिया, जिसने महामारी की शुरुआत में मध्यप्रदेश में कमलनाथ नीत कांग्रेस सरकार को गिराया था।
कमलनाथ सरकार मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक विधायकों के समर्थन वापस लेने से गिर गई थी, जिससे शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनने का रास्ता साफ हुआ था।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 24, 2023 06:44 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

