देश की खबरें | जनहित याचिका उच्च न्यायालय को स्थानांतरित, एंडोसल्फान पीड़ितों के इलाज की निगरानी करने को कहा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कासरगोड जिले में जहरीले कीटनाशक एंडोसल्फान के पीड़ितों को ‘‘चिकित्सा और देखभाल’’ प्रदान करने में राज्य सरकार के कदम की निगरानी के लिए 2011 की एक जनहित याचिका केरल उच्च न्यायालय को स्थानांतरित कर दी।
नयी दिल्ली, 16 मई उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कासरगोड जिले में जहरीले कीटनाशक एंडोसल्फान के पीड़ितों को ‘‘चिकित्सा और देखभाल’’ प्रदान करने में राज्य सरकार के कदम की निगरानी के लिए 2011 की एक जनहित याचिका केरल उच्च न्यायालय को स्थानांतरित कर दी।
वर्ष 2011 तक काजू, कपास, चाय और फलों जैसी फसलों पर एंडोसल्फान का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता था, हालांकि बाद में मनुष्यों पर दुष्प्रभाव की कई रिपोर्ट सामने आने के बाद इसके उत्पादन और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि अब कीटनाशक के पीड़ितों में से प्रत्येक को मुआवजे के रूप में 5 लाख रुपये जारी करने का मुद्दा सुलझा लिया गया है और जो एकमात्र पहलू रह गया है, वह प्रभावित व्यक्तियों को चिकित्सा और देखभाल प्रदान करने से संबंधित है।
सीजेआई ने कार्यवाही की शुरुआत में कहा, ‘‘हम अपने आदेश (निगरानी पहलू पर) का निष्कर्ष निकालेंगे और इस पहलू की निगरानी के लिए मामले को केरल उच्च न्यायालय को भेज देंगे। हम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से इस पहलू की नियमित रूप से निगरानी करने का अनुरोध करेंगे।’’
इस बीच, शीर्ष अदालत ने मुआवजे और चिकित्सा देखभाल पर अपने आदेशों के कथित गैर-अनुपालन के लिए राज्य सरकार के खिलाफ शुरू की गई अवमानना कार्यवाही बंद कर दी।
पीठ ने अपने पहले के आदेशों का हवाला दिया और कहा कि अब उच्च न्यायालय द्वारा चिकित्सा देखभाल के पहलुओं की निगरानी की जा सकती है, जो इस आधार पर संतुष्ट होने के बाद मामले को बंद किया जा सकता है।
इसने शीर्ष अदालत के रजिस्ट्रार (न्यायिक) को 2011 की जनहित याचिका के न्यायिक रिकॉर्ड को उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री में भेजकर अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, जो अब इसे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर रिट याचिका के तौर पर लेगा।
संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, पीठ ने कासरगोड जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) द्वारा कीटनाशक के पीड़ितों को मुआवजे और चिकित्सा देखभाल के भुगतान पर दायर एक रिपोर्ट का अवलोकन किया।
डीएलएसए ने जिला अस्पतालों, सामान्य अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित विभिन्न स्तरों पर कासरगोड के एंडोसल्फान प्रभावित क्षेत्रों के लिए उपलब्ध चिकित्सा और स्वास्थ्य सुविधाओं का आकलन किया था।
डीएलएसए ने देखभाल और फिजियोथेरेपी के मानकों का आकलन करने के लिए मौजूदा स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं का दौरा किया था।
इससे पहले, राज्य सरकार ने एक हलफनामा दायर करके शीर्ष अदालत को सूचित किया था कि 3,700 से अधिक पीड़ितों में से प्रत्येक को 98 प्रतिशत मुआवजे के रूप में 5 लाख रुपये का भुगतान किया गया है।
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