प्रवासी श्रमिकों की राहत के लिये याचिका निस्तारित
न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिग के माध्यम से इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि याचिका में जो राहत मांगी गयी है वह सरकार पहले ही दे चुकी है और पीठ याचिका से इतर किसी प्रार्थना पर विचार नहीं कर सकती।
नयी दिल्ली, पांच मई कोविड-19 महामारी की वजह से लागू लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में कामगारों के पलायन से उत्पन्न स्थिति के परिप्रेक्ष्य में उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि केन्द और राज्य सरकारें इन श्रमिकों को राहत प्रदान करने के लिये उचित कदम उठा रही हैं और ऐसी स्थिति में इस संबंध में जनहित याचिका लंबित रखने का कोई औचित्य नहीं है।
न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिग के माध्यम से इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि याचिका में जो राहत मांगी गयी है वह सरकार पहले ही दे चुकी है और पीठ याचिका से इतर किसी प्रार्थना पर विचार नहीं कर सकती।
पीठ ने इसके साथ ही आईआईएम, अहमदाबाद के पूर्व प्रभारी निदेशक जगदीप एस छोकर और अधिवक्ता गौरव जैन की याचिका का निस्तारण कर दिया। पीठ ने कहा कि इस याचिका को लंबित रखने की कोई वजह नहीं है। याचिका में रेलवे और राज्यों को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया था कि इन कामगारों को अपने गृहनगर तक मुफ्त यात्रा सुविधा प्रदान की जाये।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि सभी कामगारों को अपने गांव नहीं जाने दिया जा रहा है है और अनेक कामगारों को पैदल ही अपने घर लौटना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को इन कामगारों को अपने घर पहुंचने के साधन मुहैया कराने चाहिए ।
केन्द्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार इन कामगारों को सभी संभव मदद उपलबध कराने के लिये नियम और परंपराओं का पालन कर रही है। उन्होंने कहा कि शुरू मे याचिकाकर्ताओं की शिकायत थी कि प्रवासी कामगारों को उनके घर नहीं जाने दिया जा रहा और अब उन्हें इसकी अनुमति दी गयी है और सरकार भी दैनिक आधार पर स्थिति की समीक्षा कर रही है।
पीठ ने कहा कि यात्रा के लिये ट्रेन और बसें उपलब्ध करायी जा रही हैं और कुछ खबरों के अनुसार उनकी यात्रा का 85 फीसदी खर्च केन्द्र वहन कर रहा है।
भूषण का कहना था कि रेलवे कह रहा है कि राज्यों को इन श्रमिकों से किराया लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि केन्द्र से 85 प्रतिशत सहायता की खबर सही हो सकती है लेकिन 15 फीसदी का भुगतान भी इन कामगारों के लिये बहुत ज्यादा है क्योंकि इनकी आजीविका का साधन ही खत्म हो गया है।
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(The above story first appeared on LatestLY on May 05, 2020 04:51 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

