देश की खबरें | चुनावी बॉन्ड के जरिये भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई जांच कराने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर

नयी दिल्ली, सात अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय में सोमवार को एक याचिका दायर की गई, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों को व्यक्तियों या कंपनियों द्वारा चुनावी बॉन्ड के माध्यम से दिए गए चंदे में कथित भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के आरोपों की अदालत की निगरानी में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच का अनुरोध किया गया है।

मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने याचिकाकर्ता को अपनी याचिका की पोषणीयता और मुद्दे पर कानूनी स्थिति पर एक नोट दाखिल करने के लिए समय दिया। इसी के साथ अदालत ने मामले की सुनवाई 29 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध की।

खुद को जनहित के मुद्दों पर काम करने वाला कार्यकर्ता बताते हुए सुदीप नारायण तमनकर नामक व्यक्ति ने यह याचिका दायर की है। याचिका में 18 अप्रैल, 2024 को उनके द्वारा की गई शिकायत की जांच सीबीआई से कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान याचिका पर सवाल उठाए और मौखिक रूप से कहा कि भुगतान संसद के अधिनियम के अनुसार किया गया था, और इसलिए यह नहीं माना जा सकता है कि यह ‘‘गौण उद्देश्य’’ के लिए किया गया था।

पीठ ने रेखांकित किया कि तमनकर ने इसी प्रकार की याचिका उच्चतम न्यायालय के समक्ष दायर की थी, जिसका दो अगस्त को यह कहते हुए निपटारा कर दिया गया था कि लेन-देन की उपस्थिति या अनुपस्थिति के संबंध में इस प्रकार की व्यक्तिगत शिकायतों के संबंध पर कानून के तहत उपलब्ध उपायों के आधार पर आगे कार्रवाई की जानी चाहिए।

शीर्ष अदालत ने दो अगस्त को चुनावी बॉन्ड योजना की अदालत की निगरानी में जांच का अनुरोध करने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था और कहा था कि वह असंबद्ध मामले की जांच करने का आदेश नहीं दे सकती।

उच्च न्यायालय ने सोमवार को शीर्ष अदालत के आदेश का संदर्भ देते हुए कहा कि चूंकि शीर्ष अदालत का मानना ​​है कि आरोप धारणाओं पर आधारित हैं, इसलिए अनुच्छेद 226 के तहत दायर याचिका पर विचार करते समय यह टिप्पणी उच्च न्यायालय पर भी लागू होगी।

पीठ ने कहा, ‘‘आपका मामला एक धारणा पर आधारित है। मामले को सीबीआई को भेजना बहुत मुश्किल है। हम धारणाओं के आधार पर मामले को सीबीआई को कैसे भेज सकते हैं? धारणाओं के लिए आपको स्थानीय पुलिस के पास जाना होगा।’’

याचिकाकर्ता का पक्ष रख रहे अधिवक्ता प्रणव सचदेवा ने दलील दी कि न तो सीबीआई की ओर से कोई अद्यतन जानकारी दी गई, न ही उनके आवेदन पर कोई कार्रवाई की गई।

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