देश की खबरें | अवैध रोगविज्ञान प्रयोगशालाओं के नियमन के लिए अदालत में दायर की गई याचिका
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, आठ नवंबर दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है जिसमें कहा गया है राज्य सरकार के स्वास्थ्य विधेयक 2019 या दिल्ली नैदानिक स्थापना अधिनियम 2010 को तत्काल लागू किया जाना चाहिए क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में बिना अनुमति के रोगविज्ञान (पैथॉलजी) प्रयोगशालाएं संचालित हो रही हैं जिनका कोई हिसाब-किताब नहीं है।

उपभोक्ता अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता बेजान कुमार मिश्रा की ओर से दायर आवेदन में कहा गया है कि अवैध और बिना अनुमति के चल रही इन प्रयोगशालाओं से लोगों का जीवन खतरे में पड़ सकता है।

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वकील शशांक देव सुधि के जरिये मिश्रा द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि अदालत ने 2018 में दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि वह उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देशों के अनुसार उचित कदम उठाते हुए अवैध और बिना अनुमति के चल रही प्रयोगशालाओं पर कार्रवाई करे लेकिन इस मसले पर कुछ नहीं किया गया।

याचिका में कहा गया कि दिल्ली सरकार ने “अवैध रोगविज्ञान प्रयोगशालाओं या डायग्नोस्टिक केंद्रों के नियमन के लिए कोई प्रयास नहीं किया जो नियमों के विरुद्ध चल रहे हैं और वहां योग्य रोगविज्ञानी भी नहीं हैं।”

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याचिका में कहा गया कि राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) के अनुसार एक हजार डायग्नोस्टिक प्रयोगशालाएं हैं जिनमें से केवल 10 प्रतिशत ही एनएबीएल द्वारा मान्यता प्राप्त हैं।

याचिका में कहा गया, “इसलिए अवैध प्रयोगशालाओं और डायग्नोस्टिक केंद्रों का तत्काल नियमन किये जाने की आवश्यकता है।” जनहित याचिका पर सुनवाई 14 दिसंबर को होगी।

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