देश की खबरें | जवाहरबाग कांड की सीबीआई जांच के लिये न्यायालय में याचिका दायर

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मथुरा के जवाहर बाग में 2016 को हुयी हिंसक झड़प में शहीद पुलिस अधिकारी की पत्नी ने इस मामले की केन्द्रीय जांच ब्यूरो से जांच के लिये उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है।

नयी दिल्ली, 13 जुलाई मथुरा के जवाहर बाग में 2016 को हुयी हिंसक झड़प में शहीद पुलिस अधिकारी की पत्नी ने इस मामले की केन्द्रीय जांच ब्यूरो से जांच के लिये उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है।

जवाहर बाग को लोगों के कब्जे से हटाने की कार्रवाई के दौरान दो जून, 2016 को हुयी हिंसा में दो पुलिस अधिकारियों सहित 20 से ज्यादा व्यक्ति मारे गये थे।

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इस हिंसक झड़प में शहीद हुये मथुरा के पुलिस अधीक्षक (नगर) मुकुल द्विवेदी की पत्नी अर्चना द्विवेदी ने याचिका में कहा है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दो मार्च 2017 को सीबीआई को दो महीने के भीतर जांच पूरी करने का आदेश दिया था। लेकिन अब 40 महीने बीत चुके हैं और अभी तक ‘राज्य के ताकतवर नेताओं और शीर्ष अधिकारियों‘ से पूछताछ नहीं की गयी है।

उत्तर प्रदेश सरकर ने जनवरी, 2014 में राम वृक्ष यादव के संगठन आजाद भारत विधिक वैचारिक को इस मैदान में दो दिन के लिये प्रदर्शन करने की अनुमति प्रदान की थी।

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हालांकि, इस संगठन के सदसयों ने दो साल से भी अधिक समय तक इस सार्वजनिक पार्क में कब्जा जमाये रखा। इस संगठन का दावा है कि उसका संबंध नेताजी सुभाष चंद्र बोस से है।

उच्च न्यायालय के आदेश के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा के बाद पार्क में डेरा जमाये लोगों को वहां से बेदखल किया जा सका।

अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे के माध्यम से दायर इस याचिका में अर्चना द्विवेदी ने सारे मामले की दो महीने के भीतर जांच के लिये पर्याप्त संख्या के साथ सीबीआई के दल का गठन करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। जवाहर बाग में हुयी हिंसा में पुलिस अधीक्षक मुकुल द्विवेदी के साथ ही थाना प्रभारी फराह, संतोष यादव और कई अन्य की जान चली गयी थी।

याचिका में कहा गया है कि इस मामले में अभी तक तत्कालीन जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गयी है जिन्होंने जानबूझकर याचिकाकर्ता के पति को निहत्थे पुलिसकर्मियों के साथ पार्क खाली कराने की कार्रवाई का आदेश दिया था।

याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता को इसमें एक बड़ी साजिश लगती है और उसका मानना है कि न्यायालय के उचित आदेश के बगैर इस मामले में सच्चाई सामने नहीं आयेगी। याचिका के अनुसार ऐसा लगता है कि इस मामले में सीबीआई पर दोषी नेताओं और शीर्ष अधिकारियों को बचाने का बहुत ज्यादा दबाव है।

याचिका में उप्र सरकार को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह इस घटना की गहराई से जांच करने के लिये सीबीआई को सारे जरूरी रिकार्ड मुहैया कराये और उन लोगों की पहचान बताये जो ड्यूटी में लापरवाही के लिये जिम्मेदार हैं और मथुरा जिला प्रशासन की कार्रवाई को रोक रहे हैं।

याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता के पति पर राजनीतिक-पंथ सांठगांठ तथा उच्च प्राधिकारियों की ओर से जबर्दस्त दबाव था। वह अपनी नृशंस हत्या के दिन से दो दिन पहले से ठीक से खा पी नहीं रहे थे। एक ओर उन्हें जवाहर बाग खाली कराने की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी, दूसरी ओर वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में सख्त कार्रवाई करने से उन्हें रोक रहे थे।

याचिका के अनुसार इस तरह की रहस्यमय परिस्थितियों में उन्होंने अपनी निर्धारित कार्रवाई से एक दिन पहले जवाहर बाग की चाहरदीवार तोड़ने का आदेश दिया। उनके साथ हाल ही में भर्ती कुछ पुलिसकर्मी थे जिनके पास सिर्फ लाठियां थीं।

याचिका में कहा गया है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने शस्त्र ले जाने की अनुमति नहीं दी थी जिस वजह से उनका सशस्त्र अंगरक्षक, सुरक्षा पार्टी और यहां तक कि उनकी सर्विस रिवाल्वर भी उनके पास नहीं थीं। यही बातें एक व्यापक साजिश की ओर इशारा करती हैं।

याचिका के अनुसार चूंकि सीबीआई ने यादव और उसके साथियों के मोबाइल फोन के विवरण की जांच नहीं की है और ऐसा लगता है कि डीएनए जांच जैसे परीक्षण भी नहीं कराये गये जिस वजह से यह भी स्पष्ट नहीं है कि राम वृक्ष यादव मर गया है या जिंदा है।

याचिका में कहा गया है कि राम वृक्ष यादव के खिलाफ अकेले मथुरा में ही दो दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज हैं जबकि दूसरे जिलों में भी कई अन्य मामले लंबित हैं।

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