देश की खबरें | वकीलों के कार्यालयों पर वाणिज्यिक संपत्ति कर के खिलाफ याचिका पर अगले हफ्ते होगी सुनवाई

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एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 25 सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि वह वकीलों के एक एसोसिएशन द्वारा दायर उस याचिका पर 30 सितंबर को सुनवाई करेगा जिसमें नगर निगमों द्वारा अधिवक्ताओं के कार्यालयों पर वाणिज्यिक संपत्ति कर लगाने को चुनौती दी गयी है।

न्यायमूर्ति एन वजीरी ने कहा कि याचिका में उठाया गया मुद्दा जनहित याचिका की प्रकृति का है। अदालत ने इसे उचित पीठ के समक्ष अगले बुधवार को सूचीबद्ध करने को कहा। यह मुख्य न्यायाधीश के आदेश के अधीन होगा।

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याचिका में नगर निकायों के उस फैसले को चुनौती दी गयी है जिसमें किसी वकील द्वारा उपयोग किए जा रहे किसी परिसर को 'वाणिज्यिक गतिविधि' मानने और उसके अनुसार कर लगाने की बात की गयी है।

दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) ने अध्यक्ष मोहित माथुर और सचिव अभिजात के जरिए दायर याचिका में दक्षिण दिल्ली नगर निगम द्वारा नवंबर 2018 में पारित आकलन आदेश को चुनौती दी गयी है।

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इसके बाद तीनों नगर निगमों द्वारा जारी किसी अन्य नोटिस को भी चुनौती दी गयी है।

याचिका में कहा गया है कि दिल्ली नगर निगम कानून के तहत संपत्ति कर के आकलन के नए तरीके में 'उपयोग कारक' प्रणाली शुरु की गयी और अधिवक्ताओं के लिए कोई विशिष्ट श्रेणी नहीं है। लेकिन उनसे वाणिज्यिक संपत्ति पर लागू तरीकों के आधार पर शुल्क लिया जा रहा है जिसमें उच्चतम कर है।

याचिका में कहा गया है कि वकील अपने मुवक्किलों का प्रतिनिधित्व करने के लिए अदालत में पेश होते हैं लेकिन वास्तव में वे न्याय देने के लिए अदालत की मदद करते हैं और यह व्यावसायिक गतिविधि नहीं हो सकती। याचिका में तीनों नगर निगमों को पक्षकार बनाया गया है।

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