नयी दिल्ली, 30 सितंबर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बाबरी विध्वंस मामले में विशेष सीबीआई अदालत के फैसले पर बुधवार को सवाल उठाए और केंद्रीय जांच एजेंसी से इस फैसले के खिलाफ अपील करने का अनुरोध किया।
पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव वली रहमानी ने एक बयान में दावा किया, ‘‘यह फैसला न्याय से कोसों दूर है। यह न तो सबूत और न ही कानून पर आधारित है।’’
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उन्होंने कहा, ‘‘ आरोपियों को बरी करने का जो भी कारण हो, लेकिन हम सबने विध्वंस के वीडियो एवं तस्वीरें देखी हैं। इस साजिश में कौन लोग शामिल थे, ये सबको पता है।’’
रहमानी ने कहा, ‘‘हम आग्रह करते हैं कि कानून के शासन को बरकरार रखने के लिए सीबीआई (फैसले के खिलाफ) अपील करे।’’
कई दूसरे मुस्लिम संगठनों ने भी अदालत के फैसले को लेकर सवाल किए।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने बाबरी विध्वंस मामले में विशेष अदालत के फैसले को लेकर सवाल खड़े करते हुए बुधवार को दावा किया कि यह फैसला पिछले साल अयोध्या मामले में आए उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ है।
जमीयत प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने एक बयान में कहा, ‘‘सवाल यह है कि जब बाबरी मस्जिद तोड़ी गई तो फिर सीबीआई की नज़र में सब निर्दोष कैसे हो गए? क्या यह न्याय है?’’
उन्होंने दावा किया कि यह फैसला पिछले साल अयोध्या मामले में आए उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव महमूद मदनी ने दावा किया, ‘‘यह फैसला अत्यधिक दुखद और न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। यह एक ऐसा फैसला है जिसमें न इंसाफ किया गया है और न इसमें कहीं इंसाफ दिखता है। इसने न्यायालय की आज़ादी पर वर्तमान में लगाए गए प्रश्नवाचक चिन्ह को और गहरा कर दिया है।’’
जमात-ए-इस्लामी हिंद के प्रमुख सैयद सदातुल्ला हुसैनी ने कहा, ‘‘लोग 28 साल से इंसाफ की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन इंसाफ नहीं हुआ। उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि विध्वंस एक आपराधिक कृत्य था। ऐसे में विशेष अदालत का फैसला समझ से परे है।’’
गौरतलब है कि सीबीआई की विशेष अदालत ने छह दिसम्बर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले में बुधवार को बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश एस के यादव ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना पूर्व नियोजित नहीं थी, यह एक आकस्मिक घटना थी। उन्होंने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोई पुख्ता सुबूत नहीं मिले, बल्कि आरोपियों ने उन्मादी भीड़ को रोकने की कोशिश की थी।
हक
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