पाकिस्तान में हटा पीरियड्स टैक्स, लेकिन क्या इससे आएगी बराबरी?
पाकिस्तान के नए बजट में पीरियड से जुड़े सामानों पर लगने वाले टैक्स को हटाने का ऐलान किया गया है.
पाकिस्तान के नए बजट में पीरियड से जुड़े सामानों पर लगने वाले टैक्स को हटाने का ऐलान किया गया है. हालांकि सवाल है कि क्या टैक्स हटाने से सब तक इन इन सामानों की पहुंच सुनिश्चित की जा सकती है?दुनिया की आधे से ज्यादा आबादी अपने पूरे जीवनकाल में करीब 450 बार पीरियड्स से गुजरती है. इसके लिए औसतन उन्हें हर महीने 15 से 25 सैनिटरी पैड की जरूरत पड़ती है. यानी पीरियड्स से जुड़े सामान जरूरत हैं, लग्जरी नहीं. मुश्किल यह है कि दुनिया के करीब 50 करोड़ लोग ऐसे हैं जिनकी पहुंच से ये चीजें आज भी दूर हैं. इसे दूर करने की कोशिश में पाकिस्तान ने एक कदम उठाया है.
पाकिस्तान में दशकों से पीरियड्स के दौरान इस्तेमाल होने वाली चीजें जैसे सैनिटरी पैड, मेंस्ट्रुअल कप वगैरह ‘लग्जरी सामान' की श्रेणी में आती थीं और इन पर 18 फीसदी का टैक्स लगता था. अब पाकिस्तान सरकार ने अपना नया बजट पेश करने के दौरान ऐलान किया कि 1 जुलाई से पीरियड्स प्रोडक्ट्स पर किसी भी तरह का कोई टैक्स नहीं लगेगा.
पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने कहा कि ये प्रोडक्ट्स महिलाओं की सेहत, उनके सम्मान और सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए बेहद जरूरी हैं. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि पाकिस्तान गर्भनिरोधकों पर भी टैक्स घटाने के बारे में सोच रहा है क्योंकि देश की आबादी तेजी से बढ़ रही है.
वकीलों और एस्टिविस्टों की मेहनत का नतीजा
पाकिस्तान की सरकार के इस अहम फैसले के पीछे हैं एक्टिविस्ट और मानवाधिकार वकील महनूर उमर. उन्होंने पिछले साल सितंबर के महीने में अपने एक और साथी वकील एहसान जहांगीर खान के साथ मिलकर पीरियड्स प्रोडक्ट्स पर लगने वाले टैक्स के खिलाफ याचिका दाखिल की थी. इसके बाद वह लगातार इस टैक्स के खिलाफ मेंस्ट्रुएशन के मुद्दे पर काम करने वाले ‘बैठक, पिंक सेंटर, हर पाकिस्तान’ जैसे गैर सरकारी संगठनों के साथ मिलकर अभियान भी चला रही थीं.
अब पाकिस्तान सरकार के इस फैसले के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें खुशी है कि सरकार ने एक साल के अंदर ही ये फैसला लिया. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अभी देखना बाकी है कि यह फैसला कितने बेहतर ढंग से लागू किया जाएगा.
क्या टैक्स घटाने से हट जाएगी पीरियड पॉवर्टी?
दुनिया के ज्यादातर विकासशील देश इस वक्त पीरियड पॉवर्टी से गुजर रहे हैं. ये ऐसे हालात हैं जिनमें लोगों के पास पीरियड्स से जुड़े सामान खरीदने का कोई साधन नहीं होता. पाकिस्तान की हालत भी इस मामले में कमोबेश यही रही है. 2024 में आई संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में 44 फीसदी लड़कियों और महिलाओं के पास पीरियड्स के दौरान काम आने वाले जरूरी संसाधन मौजूद नहीं हैं. केवल 12 फीसदी लड़कियां और महिलाएं ही वहां सैनिटरी पैड का इस्तेमाल कर पाती हैं. इसके पीछे पीरियड्स से जुड़े टैबू, महंगे सामान जैसी वजहें शामिल हैं.
सैनिटरी प्रोडक्ट्स से टैक्स हटाना एक सराहनीय कदम जरूर हो सकता है लेकिन पीरियड्स पॉवर्टी की समस्या का समाधान नहीं. यूके के इंस्टिट्यूट फॉर फिस्कल स्टडी की एक रिपोर्ट के मुताबिक पीरियड्स से जुड़े सामानों से टैक्स हटाने को एक 'सांकेतिक जीत' के तौर पर देखा जाना चाहिए. रिपोर्ट में ऐसे कदम की तुलना गरीबों के लिए चलाई जाने वाली कैश ट्रांसफर योजनाओं से की गई है.
दुनिया के 50 से ज्यादा देशों में पीरियड्स से जुड़े सामानों पर लगने वाले हर तरह के टैक्स को हटा दिया गया है. लेकिन रिपोर्ट कहती है कि टैक्स हटाना दरअसल एक महंगा कदम साबित होता है क्योंकि यह सिर्फ उन पर क्रेंदित होता है जिनकी पहुंच पहले से ही इन चीजों तक है.
जर्नल ‘साइंस डायरेक्ट' की रिपोर्ट बताती है कि यूरोपीय देशों में सैनिटरी प्रोडक्ट्स पर टैक्स हटाने की घोषणाओं के बाद कीमतों पर तो असर पड़ा लेकिन इनकी मांग में कोई बड़ा फर्क नजर नहीं आया. ऐसा इसलिए क्योंकि ये घटी हुई कीमतें भी एक बड़े तबके की पहुंच से दूर हैं.
क्या पीरियड्स प्रोडक्ट्स से जीएसटी हटाने से भारत में बदले हालात?
भारत में भी मेंस्ट्रुअल प्रोडक्ट्स को साल 2018 में जीएसटी के दायरे से हटा दिया गया था. इसके बावजूद सैनिटरी पैड की कीमतों में कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिला. वह इसलिए क्योंकि पैड बनाने के लिए जरूरी कच्चे माल की कीमतों और उन पर लगने वाले टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया. ना ही पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली चीजों पर टैक्स घटा है, नतीजा पीरियड्स टैक्स हटाना सिर्फ एक ‘सांकेतिक जीत' के तौर पर ही उभरकर सामने आता है.
भारत में पीरियड्स पर जागरूकता फैलाने का दायित्व निभाती मुहिम संस्था की संस्थापक स्वाती सिंह कहती हैं, "टैक्स नहीं लगाना किसी खास वर्ग तक ही सीमित लाभ दे सकता है, जो पहले से पीरियड्स मैनेजमेंट प्रोडक्ट इस्तेमाल कर रहे हैं. बाकी भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में तो इन पर से जीएसटी हटाने से कोई खास फर्क पड़ता नहीं दिखता है."
स्वाति सिंह ने यह भी कहा, "ग्रामीण क्षेत्रों में काम करते हुए अभी भी हमलोग देख रहे कि महिलाएं और किशोरियां कपड़े का इस्तेमाल करती हैं. उनके लिए पैड का इस्तेमाल एक लग्जरी है, अगर उनके पास एक पैक पैड होता भी है तो उसे वो किसी खास लंबी यात्रा या खेत में देर तक काम करने वाले दिन के लिए संभाल कर रखती है. वहीं, समाज का वह तबका जो पैड का इस्तेमाल करता है उसके लिए जीएसटी लगाने या हटाने से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा.”
पीरियड्स टैक्स हटाना एक जरूरी कदम तो है लेकिन यह काफी हद तक प्रतीकात्मक भी है. यह कीमतों को मामूली रूप से कम करता है. इस मुद्दे पर काम करने वाले लोगों का मानना है कि टैक्स केवल सामानों की कीमतों से हटाना नाकाफी है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 19, 2026 05:51 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

