देश की खबरें | मानव तस्करी से मुक्त कराये गये लोग इस सामाजिक बुराई के बारे में जगा रहे हैं अलख

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बिहार में मानव तस्करी प्रभावित क्षेत्र के गांवों में हर सुबह 19 वर्षीय मोहम्मद छोटू साइकिल से गश्त करता है और लोगों को उस सामाजिक बुराई के बारे में जागरूक करता है, जिसके दंश को उसने बाल श्रमिक के रूप में झेला था।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 13 सितंबर बिहार में मानव तस्करी प्रभावित क्षेत्र के गांवों में हर सुबह 19 वर्षीय मोहम्मद छोटू साइकिल से गश्त करता है और लोगों को उस सामाजिक बुराई के बारे में जागरूक करता है, जिसके दंश को उसने बाल श्रमिक के रूप में झेला था।

छोटू 2009 में जब महज आठ साल का था, तब उसे फैक्टरी में बाल श्रमिक के रूप में काम करने के लिए दिल्ली लाया गया था।

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उसने कहा कि उसे 2014 में मुक्त कराये जाने तक अत्यधिक भावनात्मक और शारीरिक उत्पीड़न झेलना पड़ा था।

उसने कहा, ‘‘ मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि मैं 2009 में महज आठ साल की उम्र में दिल्ली स्थित एक फैक्टरी में बाल श्रमिक के रूप में जिस स्थिति से गुजरा, उससे किसी और को न गुजरना पड़े।’’

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लेकिन इस तरह के हालात का सामना करने वाला छोटू कोई अकेला व्यक्ति नहीं है। मानव तस्करी की गिरफ्त से मुक्त करा कर बिहार के विभिन्न जिलों में लाये गये उसके जैसे 50 अन्य लोग हैं और वे भी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि गांवों में बच्चे सुरक्षित रहें। दअरसल विशेषज्ञों को इस बात की चिंता है कि कोविड-19 के बाद बाल तस्करी बेतहाशा बढ़ सकती है क्योंकि कई परिवारों की इस महामारी के बाद आजीविका चली गयी है।

बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन कैलाश सत्यार्थी फाउंडेशन के मुक्ति कारवां अभियान के तहत छोटू और अन्य लोगों ने दावा किया कि उन्होंने दर्जनों बच्चों को तस्करी से बचाया है।

एनजीओ के प्रवक्ता राकेश सेंगर ने कहा, ‘‘ हम इस अभियान के पहले चरण में पांच जिलों के पांच सौ गांवों में जा रहे हैं। यह अभियान दस जिलों के 1000 गांवों में चलाया जाएगा। पहले चरण में हम जिन जिलों में जा रहे हैं वे सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, कटिहार और गया हैं। ’’

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