देश की खबरें | चुनाव बाद हिंसा से प्रभावित लोग एनएचआरसी, महिला आयोग में कर सकते हैं शिकायत: अदालत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को निर्देश दिया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा में प्रभावित कोई भी व्यक्ति राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग (डब्ल्यूबीएचआरसी) , राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग (एनसीएससीएसटी) में शिकायत दर्ज करा सकता है।

कोलकाता, 18 मई कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को निर्देश दिया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा में प्रभावित कोई भी व्यक्ति राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग (डब्ल्यूबीएचआरसी) , राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग (एनसीएससीएसटी) में शिकायत दर्ज करा सकता है।

राज्य में चुनाव बाद हिंसा को लेकर दायर की गयी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पांच न्यायाधीशों की पीठ ने निर्देश दिया कि ये आयोग तत्काल इन शिकायतों को पुलिस महानिदेशक (डीजी) के पास भेजेंगे।

पीठ ने कहा, ‘‘ हम निर्देश देते हैं कि यदि कोई व्यक्ति चुनाव बाद हिंसा में प्रभावित हुआ है तो उसे संबंधित दस्तावेजों के साथ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग (डब्ल्यूबीएचआरसी) , राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग (एनसीएससीएसटी) में शिकायत दर्ज कराने की छूट होगी। ’’

न्यायालय ने निर्देश दिया कि शिकायत पत्र के तौर पर या ऑनलाइन दर्ज करायी जा सकती है। साथ ही न्यायालय ने अगली सुनवाई की तारीख 25 मई तय की ।

इस पीठ में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश बिंदाल, न्यायमूर्ति आई पी मुखर्जी , न्यायमूर्ति हरीश टंडन, न्यायमूर्ति सौमेन सेन और न्यायमूर्ति सुब्रत तालुकदार हैं।

राज्य सरकार ने अदालत से आयोगों से पुलिस महानिदेशक को मिली शिकायतों की संख्या पर सूचना देने के पिछले अदालती आदेश के अनुपालन को लेकर समय मांगा।

पिछली सुनवाई के दौरान पीठ ने राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे महाधिवक्ता से अदालत को पीड़ित व्यक्ति द्वारा ऑनलाइन शिकायत करने के लिए निर्धारित ई-मेल आईडी बताने का अनुरोध किया था।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें थानों में शिकायत दर्ज नहीं कराने दी गयी और कुछ मामलों में तो वे ऐसा नहीं कर पाये क्योंकि चुनाव बाद हिंसा से उन्हें अपने निवास स्थान छोड़कर भागना पड़ा। सरकार ने इस पर सूचना उपलब्ध कराने के लिए समय मांगा था।

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