ताजा खबरें | दंड विधेयक चर्चा दो रास

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. उन्होंने कहा कि 102 साल पुराने कानून में संशोधन इसलिए किया गया है ताकि आधुनिक तकनीक के आधार पर अपराध के मामले में गिरफ्तार लोगों का विभिन्न प्रकार का ब्यौरा एकत्र करने की व्यवस्था हो।

उन्होंने कहा कि 102 साल पुराने कानून में संशोधन इसलिए किया गया है ताकि आधुनिक तकनीक के आधार पर अपराध के मामले में गिरफ्तार लोगों का विभिन्न प्रकार का ब्यौरा एकत्र करने की व्यवस्था हो।

उन्होंने कहा कि इन उपायों से जांच अधिकारियों को अपराध की जांच एवं दोष सिद्धि में मदद मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि आज अपराधियों एवं अपराध का दायरा असीमित हो गया है, नए-नए अपराध सामने आ रहे हैं और इसका कारण यह है कि अपराधी आज आधुनिक प्रौद्योगिकी की मदद ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई देश प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से अपराध की जांच करते हैं, उसका पता लगाते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे देश में इसके लिए गहन मंथन हुआ, विशेषज्ञों की राय ली गई। मैं कह सकता हूं कि देर से ही सही, हमने भी कदम उठा लिया।’’

जेठमलानी ने कहा कि दोषसिद्धी की दर कम होने का मतलब होता है कि कहीं न कहीं कुछ खामी है और इसका मुख्य कारण समय में बदलाव के साथ साथ आधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल नहीं करना है।

उन्होंने कहा कि नार्को परीक्षण, लाई डिटेक्टर जांच, ब्रेन मैपिंग जांच पर इस विधेयक में कहीं भी रोक नहीं लगाई गई है। उन्होंने कहा ‘‘जो नमूने लिए जाएंगे वे फिंगर प्रिंट, फुट प्रिंट, हथेली का प्रिंट, रेटीना स्कैन होंगे।’’

जेठमलानी ने कहा ‘‘नार्को परीक्षण, लाई डिटेक्टर जांच और ब्रेन मैपिंग के लिए स्पष्ट व्यवस्था है कि ये परीक्षण व्यक्ति के सोते समय नहीं किए जा सकते। स्पष्ट है कि इसके लिए मर्जी पूछी जाएगी। ’’

उन्होंने कहा ‘‘ चिदंबरम के अनुसार, विधेयक में मामूली अपराधों में हिरासत के बजाय सीधे गिरफ्तारी का प्रावधान है। 1975 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने मामूली अपराध भी न करने वालों को बड़ी संख्या में गिरफ्तार कर लिया था।’’

जेठमलानी ने कहा कि पहले ज्यादातर काम कागज पर होते थे और आरोपी की फोटो आदि को रिकॉर्ड में रखा जाता था लेकिन अब ‘‘डिजिटल दौर’’ है जिसमे प्रौद्योगिकी को शामिल करना अनिवार्य हो गया है। इसे ध्यान में रखते हुए माप लेना जरूरी हो गया है।

उन्होंने कहा कि रेटीना की स्कैनिंग सर्वाधिक विश्वसनीय बायोमैपिंग जांच है जो निश्चित रूप से अपराध का पता लगाने में मददगार होगी।

जारी

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