देश की खबरें | पेगासस विवाद: उच्चतम न्यायालय जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर 22 अप्रैल को सुनवाई करेगा

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नयी दिल्ली, सात मार्च उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि वह पत्रकारों समेत अन्य की निगरानी के लिए पेगासस ‘स्पाइवेयर’ (जासूसी करने वाला एक तरह का सॉफ्टवेयर)के कथित अनधिकृत इस्तेमाल की जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर 22 अप्रैल को सुनवाई करेगा।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सुनवाई स्थगित कर दी, क्योंकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्थगन की मांग करते हुए कहा कि मामला लंबे समय के बाद सामने आया है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि शुक्रवार को केवल दो याचिकाएं सूचीबद्ध थीं और अन्य संबंधित याचिकाएं थीं, जिन पर सुनवाई की आवश्यकता थी।

पीठ ने रजिस्ट्री को इस मुद्दे पर सभी मामलों की सुनवाई 22 अप्रैल के लिए तय करने का निर्देश दिया।

शीर्ष अदालत ने 25 अगस्त, 2022 को कहा था कि पेगासस के अनधिकृत इस्तेमाल की जांच के लिए उसके द्वारा नियुक्त तकनीकी पैनल ने जांचे गए 29 सेलफोन में से पांच में कुछ ‘मैलवेयर’ पाए, लेकिन यह नहीं माना जा सकता कि इजराइली ‘स्पाइवेयर’ का इस्तेमाल किया गया था।

शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश आर वी रवींद्रन द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को पढ़ने के बाद, शीर्ष अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार ने पेगासस जांच में सहयोग नहीं किया।

शीर्ष अदालत ने 2021 में राजनेताओं, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं की लक्षित निगरानी के लिए सरकारी एजेंसियों द्वारा इजराइली ‘स्पाइवेयर’ के उपयोग के आरोपों की जांच का आदेश दिया और मामले की जांच के लिए तकनीकी और पर्यवेक्षी समितियों की नियुक्ति की।

निगरानी पैनल ने तीन-भाग वाली एक ‘लंबी’ रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसमें से एक भाग में नागरिकों के निजता के अधिकार की रक्षा और देश की साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानून में संशोधन का सुझाव दिया गया है।

तकनीकी पैनल, जिसमें साइबर सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक, नेटवर्क और हार्डवेयर के तीन विशेषज्ञ शामिल थे, को यह ‘पूछताछ, जांच और निर्धारण’ करने के लिए कहा गया था कि क्या पेगासस ‘स्पाइवेयर’ का इस्तेमाल नागरिकों की जासूसी करने के लिए किया गया था और उनकी जांच की निगरानी की जिम्मेदारी रवींद्रन को सौंपी गई थी।

पैनल के सदस्य नवीन कुमार चौधरी, प्रभारण पी और अश्विन अनिल गुमास्ते थे। निगरानी पैनल का नेतृत्व करने वाले न्यायमूर्ति रवींद्रन को तकनीकी पैनल की जांच की निगरानी में पूर्व आईपीएस अधिकारी आलोक जोशी और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ संदीप ओबेरॉय ने सहायता प्रदान की।

शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि जांच पैनल को यह पूछताछ करने और जांच करने का अधिकार होगा कि 2019 में पेगासस ‘स्पाइवेयर’ का उपयोग करके भारतीय नागरिकों के व्हाट्सएप खातों को हैक करने से जुड़ी रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद केंद्र द्वारा क्या कदम उठाए गए या कार्रवाई की गई।

इसमें यह भी कहा गया है कि क्या भारत संघ, या किसी राज्य सरकार, या किसी केंद्रीय या राज्य एजेंसी द्वारा भारत के नागरिकों के खिलाफ उपयोग के लिए कोई पेगासस ‘स्पाइवेयर’ हासिल किया गया था।

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