देश की खबरें | 2022 में पटना ने अपना प्रसिद्ध समाहरणालय खोया; दिल्ली में धरोहर जीर्णोद्धार का काम शुरू

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. वर्ष 2022 प्राचीन धरोहरों के संबंध में एक मिला-जुला वर्ष रहा। इस दौरान सदियों पुराने पटना समाहरणालय को पुनर्विकास परियोजना के लिए ध्वस्त कर दिया गया जिसे ऑस्कर विजेता फिल्म ‘गांधी’ के प्रमुख दृश्यों में दिखाया गया था। इस साल दिल्ली सरकार ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले कई स्मारकों के जीर्णोद्धार का काम शुरू किया।

नयी दिल्ली/पटना, 31 दिसंबर वर्ष 2022 प्राचीन धरोहरों के संबंध में एक मिला-जुला वर्ष रहा। इस दौरान सदियों पुराने पटना समाहरणालय को पुनर्विकास परियोजना के लिए ध्वस्त कर दिया गया जिसे ऑस्कर विजेता फिल्म ‘गांधी’ के प्रमुख दृश्यों में दिखाया गया था। इस साल दिल्ली सरकार ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले कई स्मारकों के जीर्णोद्धार का काम शुरू किया।

ऐतिहासिक कलेक्ट्रेट (समाहरणालय) परिसर के कुछ हिस्सों को डच युग के दौरान बनाया गया था। समाहरणालय के संरक्षण से संबंधित दिल्ली स्थित विरासत निकाय इनटैक की याचिका को उच्चतम न्यायालय ने 13 मई, 2022 को खारिज कर दिया था जिससे बिहार सरकार द्वारा इसे गिराए जाने का मार्ग प्रशस्त हो गया था और फिर बुलडोजर चला दिए गए।

इस समाहरणालय को ‘गांधी’ फिल्म के दृश्यों में दिखाया गया था।

फिल्म में इसके रिकॉर्ड रूम को मोतिहारी जेल के रूप में दिखाया गया, जबकि डीएम कार्यालय भवन का उपयोग प्रसिद्ध चंपारण मुकदमे को दर्शाने वाले अदालत कक्ष के दृश्य के लिए किया गया।

स्वतंत्रता के बाद निर्मित दो इमारतों सहित आठ इमारतों को पुनर्विकास परियोजना के लिए ध्वस्त कर दिया गया, जिसे गिराने के लिए 2016 में सरकार द्वारा पहली बार प्रस्ताव दिया गया था।

इनटैक द्वारा ऐतिहासिक इमारत को विध्वंस से बचाने के लिए 2019 से कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही थी, और इसने 2020 में पटना उच्च न्यायालय में मुकदमा हारने के बाद शीर्ष अदालत में अपील की थी।

वर्ष 2022 में पटना में धरोहरों को लगातार खतरे का सामना करना पड़ा और अगला निशाना 100 साल पुराना सुल्तान पैलेस रहा। जून में बिहार सरकार ने घोषणा की कि राज्य कैबिनेट ने तीन पांच सितारा होटल बनाने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है जिनमें से एक बीर चंद पटेल पथ पर महल के स्थान पर बनाया जाएगा।

इस घोषणा ने इतिहासकारों, संरक्षणवादियों और देश के आम नागरिकों को झकझोर कर रख दिया, जिन्होंने इस फैसले का पुरजोर विरोध किया तथा "वास्तुकला के प्रतीक" को संरक्षित करने तथा "पटना के गौरव" को नष्ट नहीं करने की अपील की।

हालाँकि, बाद में एक जनहित याचिका दायर की गई और 23 सितंबर को पहली सुनवाई के बाद पटना उच्च न्यायालय ने प्रस्तावित विध्वंस पर रोक लगा दी, जिससे इतिहासकारों और धरोहर प्रेमियों के बीच यह आशा जगी कि प्रसिद्ध बैरिस्टर सर सुल्तान अहमद द्वारा निर्मित महल को भावी पीढ़ी के लिए बचाया जा सकता है।

बहरहाल, साल 2022 बिहार की राजधानी में नहीं तो राष्ट्रीय राजधानी में धरोहरों के लिए खुशखबरी भी लेकर आया।

जुलाई में, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र के तहत स्मारकों के जीर्णोद्धार पर काम शुरू हो गया है। उन्होंने रेखांकित किया कि ये अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक इमारतें "लंबे समय तक उपेक्षित रहीं" जिसके कारण धरोहर स्थलों को "बहुत अधिक" क्षति पहुंची है।

उन्होंने कहा था, "दिल्ली सरकार इन स्मारकों के जीर्णोद्धार पर काम कर रही है और उनके ऐतिहासिक महत्व का जश्न मनाने तथा इनके बारे में जागरूकता फैलाने के लिए इनके आसपास विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करेगी।"

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