देश की खबरें | संसदीय समिति ने महिलाओं को सीएपीएफ में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने, ट्रांसजेंडर के लिए आरक्षण का सुझाव दिया

नयी दिल्ली, छह अगस्त केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में महिलाओं के कम प्रतिनिधित्व को रेखांकित करते हुए एक संसदीय समिति ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से ट्रांसजेंडर के लिए आरक्षण की सिफारिश करने के अलावा महिलाओं को सेवाओं में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने को लेकर कदम उठाने को कहा है।

समिति ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में कहा कि महिला अधिकारियों के लिए एक ऐसी नीति पर विचार किया जा सकता है, जिसमें आसान पोस्टिंग दी जाए और उन्हें अत्यधिक कठिन कामकाजी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद सुशील कुमार मोदी की अध्यक्षता वाली कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय पर विभाग-संबंधित संसदीय स्थायी समिति ने कहा कि 30 सितंबर, 2022 तक सीएपीएफ और असम राइफल्स में महिला कर्मियों का प्रतिनिधित्व 3.76 प्रतिशत है।

समिति ने ‘‘भारत सरकार के भर्ती संगठनों के कामकाज की समीक्षा’’ पर अपनी 131वीं रिपोर्ट में कहा, ‘‘समिति इस बात की वकालत करती है कि महिलाओं को अधिकतम संभव सीमा तक सेना में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने वास्ते गृह मंत्रालय द्वारा सभी आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। एक बड़ी बाधा जो महिलाओं को सेना में शामिल होने से रोकती है वह कठिन इलाके और परिस्थितियां हैं जिनमें उन्हें काम करना होता है।’’

रिपोर्ट में कहा गया है, इसलिए, जब तक युद्ध या सशस्त्र विद्रोह जैसी चरम परिस्थितियों में आवश्यक न हो, महिला अधिकारियों को सुगम पोस्टिंग दी जाए और उन्हें अत्यधिक कठोर और कठिन कामकाजी परिस्थितियों में न रखा जाए, इसके लिए एक नीति तलाश की जा सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘समिति ने यह भी सिफारिश की है कि ट्रांसजेंडर को भी आरक्षण दिया जा सकता है। ट्रांसजेंडर की भर्ती के लिए भी कदम उठाए जा सकते हैं ताकि निकट भविष्य में उन्हें मुख्यधारा के समाज के साथ अच्छी तरह से एकीकृत किया जा सके।’’

केंद्रीय बलों में महिलाओं की न्यूनतम मौजूदगी के ‘‘अनिवार्य मुद्दे’’ पर समिति ने कहा, ‘‘आज तक, महिलाओं के लिए केवल 3.65 प्रतिशत रिक्तियां ही भरी गई हैं।’’

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में महिलाओं का प्रतिनिधित्व केवल 14 प्रतिशत से 15 प्रतिशत है, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल(सीआईएसएफ) में यह 6.35 प्रतिशत और भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में यह 2.83 प्रतिशत है।

समिति ने बृहस्पतिवार को संसद में प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘‘इसलिए कुछ बाधाएं हैं जो महिलाओं को सेना में शामिल होने से रोक रही हैं।’’ इसमें कहा गया कि सीएपीएफ में महिलाओं के लिए कोई विशेष आरक्षण नहीं है।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘हालांकि, सीएपीएफ में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए, 2011 में महिला सशक्तिकरण पर संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों के आधार पर, तीन वर्षों के भीतर बलों में महिलाओं का प्रतिशत पांच प्रतिशत तक लाने के निर्देश जारी किए गए थे।’’

पिछले साल 30 सितंबर तक सीएपीएफ और असम राइफल्स में 34,278 महिला कर्मी तैनात थीं। इनमें से 1,894 असम राइफल्स में, 7,470 बीएसएफ में, 9,316 सीआईएसएफ में, 9,427 केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में, 2,514 आईटीबीपी में और 3,657 महिला कर्मी एसएसबी में थीं।

समिति ने यह भी कहा कि सीमावर्ती जिलों से अधिकतम संख्या में युवाओं की भर्ती करना जरूरी है और ‘‘छत्तीसगढ़, झारखंड, पूर्वोत्तर के राज्यों तथा कश्मीर’’ के स्थानीय युवाओं के लिए एक विशेष अभियान की सिफारिश की गई है।

समिति ने कहा, ‘‘यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों के लिए 25 प्रतिशत आरक्षण और सीमावर्ती जिलों को आवंटित सीमा रक्षा बलों की 25 प्रतिशत रिक्तियों को तुरंत भरा जाए ताकि इन क्षेत्रों के युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा को बढ़ावा मिल सके और वे उग्रवाद एवं आतंकवाद के रास्ते पर ना भटके।’’

समिति ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और असम राइफल्स में सभी रिक्तियों को मिशन मोड पर भरने पर भी जोर दिया। इस साल एक जनवरी तक सीएपीएफ और असम राइफल्स में 83,127 रिक्तियां थीं।

रिपोर्ट में कहा गया कि सभी स्थानों पर सभी विभागों को निर्देश दिया जाए कि वे रिक्तियों का विवरण समय से गृह मंत्रालय को भेजें और ‘‘रिक्तियों का विवरण भेजने में सालों-साल न लगे।’’

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