देश की खबरें | संसदीय निगरानी और शासन में सुधार के लिए संसद को जनता की भागीदारी बढ़ानी चाहिए : बिरला

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बृहस्पतिवार को कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति के दौर में संसदीय निगरानी और शासन व्यवस्था में सुधार लाने के लिए विभिन्न देशों की संसद को अपने कामकाज में जनता की भागीदारी बढ़ाने की ज़रूरत है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 20 अगस्त लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बृहस्पतिवार को कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति के दौर में संसदीय निगरानी और शासन व्यवस्था में सुधार लाने के लिए विभिन्न देशों की संसद को अपने कामकाज में जनता की भागीदारी बढ़ाने की ज़रूरत है।

संसद अध्यक्षों के पांचवें विश्व सम्मेलन के दूसरे दिन ‘संसद और लोगों के बीच दूरी को कम कर शासन में सुधार’ विषय पर परिचर्चा में डिजिटल माध्यम से हिस्सा लेते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि 135 करोड़ लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व कर रही भारत की संसद जनता से सतत संपर्क बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभा रही है ।

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उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के केंद्र में पाँच ‘आई हैं जिसमें पहला ‘इंटरेक्ट’ (संवाद) है जिसके अंतर्गत हमारे सांसद हमेशा जनता से जुड़े रहते है और उनसे प्राप्त सूचना एवं सुझावों को सदन में परिलक्षित करते है । दूसरा ‘इन्फॉर्म’ है जिससे जनता को सूचना प्रसार माध्यमों और सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार सरकार की योजनायों और नीतियों के बारे में अवगत कराया जाता है ।

बिरला ने कहा कि तीसरा ‘इंवोल्व’ (सहभागिता) है जिससे जन-जन को विकास प्रक्रिया में शामिल किया जाता है; ‘इम्बाइब’ (आत्मसात) करना है जिसके तहत जनता से शासन प्रक्रिया पर मिले सुझावों को आत्मसात किया जाता है। उन्होंने कहा कि इसमें अंतिम ‘इम्प्रूव’ (सुधार) है जिसके के तहत शासन प्रक्रिया एवं योजनायों में अपेक्षित सुधार किया जाता है।

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लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘ सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति के इस दौर में संसदीय निगरानी और शासन में सुधार लाने के लिए सभी संसदों को अपने कामकाज में जनता की भागीदारी बढ़ाने की ज़रूरत है।’’

लोकसभा सचिवालय के बयान के अनुसार, बिरला ने कहा कि हमारी संसद जन-जन से जुड़ी हुई है तथा पारदर्शिता और सुशासन सुनिश्चित करने पर हमेशा ज़ोर देती है ।

उन्होंने कहा कि कोविड–19 महामारी के दौरान भी हमारी संसद ने सांसदों के माध्यम से जनता के बीच निरंतर संपर्क बनाये रखा और हज़ारों ज़रूरतमंद लोगों को तत्काल राहत और आवश्यक सहायता प्रदान कराई।

उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा टी.वी. चैनलों पर सदन की कार्यवाही के सीधे प्रसारण, समर्पित वेबसाइटों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से हम संसद को घर-घर पहुंचाने में सफल रहे है।

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