ताजा खबरें | अर्हित वित्तीय संविदा द्विपक्षीय नेटिंग विधेयक को संसद की मंजूरी

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नयी दिल्ली, 23 सितंबर संसद ने बुधवार को योग्य वित्तीय अनुबंधों के द्विपक्षीय शुद्धिकरण के लिए कानूनी ढांचा मुहैया कराने वाले एक विधेयक को मंजूरी प्रदान कर दी।

अर्हित वित्तीय संविदा द्विपक्षीय नेटिंग विधेयक-2020 को बुधवार को राज्यसभा की मंजूरी मिल गई। लोकसभा ने इस विधेयक को रविवार को पारित किया था।

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इस कानून के तहत योग्य वित्तीय अनुबंधों के शुद्धिकरण की अनुमति दी गई है। यहां शुद्धिकरण का आशय वित्तीय अनुबंधों के ऋण, निपटान और अन्य जोखिमों को कम करने से है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस विधेयक को देश में वित्तीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बताया और कहा कि यह दो पक्षों के द्विपक्षीय शुद्धिकरण के लिए कानूनी आधार मुहैया करता है।

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उन्होंने कहा कि कुल वित्तीय अनुबंधों में द्विपक्षीय अनुबंध की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है, जबकि बहुपक्षीय अनुबंध की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत हैं।

इस विधेयक के माध्यम से भारतीय वित्तीय बाजार में अर्हित वित्तीय संविदाओं की द्विपक्षीय नेटिंग की प्रवर्तनीयता का उपबंध करके वित्तीय स्थायित्व सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है।

उल्लेखनीय है कि जब दो पक्ष एक दूसरे की देनदारियों का निपटान इस प्रकार करते हैं जिसके उपर ज्यादा देनदारी हो, वह एक तय राशि का भुगतान दूसरे के पक्ष में करे, तो उसे नेटिंग कहते हैं ।

विधेयक पर हुयी संक्षिप्त चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के सुरेश प्रभु ने कहा कि वित्तीय बाजार वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी होते हैं क्योंकि वे बाजार के लिए तरलता उपलब्ध कराते हैं। इस लिए इन बाजारों का नियमन करना चुनौतीपूर्ण होता है।

उन्होंने सरकार के विधेयक का स्वागत करते हुए कहा कि इसमें नियमन के लिए जो कदम उठाये हैं, उससे बाजार के प्रोत्साहन मिलेगा।

अन्नाद्रमुक के ए विजय कुमार ने जहां इस विधेयक का समर्थन करते हुए इस संबंध में कई सुझाव दिये, वहीं बीजू जनता दल के सुजीत कुमार ने यह विधेयक लाने के लिए सरकार को बधाई देते हुए इसे देश की अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए मील का पत्थर करार दिया।

तेलुगु देशम पार्टी के के रवीन्द्र कुमार और भाजपा के महेश पोद्दार ने भी इस विधेयक का समर्थन किया। पोद्दार ने कहा कि यह भविष्योन्मुखी कदम साबित होगा।

उल्लेखनीय है कि विधेयक पर चर्चा के दौरान ज्यादातर विपक्षी दलों के सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे। सदन में रविवार को हुए हंगामे को लेकर आठ विपक्षी सदस्यों के निलंबन के विरोध में विपक्ष के कई दलों के सदस्य सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर रहे हैं।

माधव अविनाश

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