ताजा खबरें | संसद ने ‘भारतीय प्रबंध संस्थान संशोधन विधेयक’ को मंजूरी दी

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. संसद ने मंगलवार को ‘भारतीय प्रबंध संस्थान संशोधन विधेयक, 2023’ को मंजूरी दी जिसमें मुंबई स्थित राष्ट्रीय औद्योगिक इंजीनियरिंग संस्थान (नीति) को भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) का दर्जा दिया जा रहा है।

नयी दिल्ली, आठ अगस्त संसद ने मंगलवार को ‘भारतीय प्रबंध संस्थान संशोधन विधेयक, 2023’ को मंजूरी दी जिसमें मुंबई स्थित राष्ट्रीय औद्योगिक इंजीनियरिंग संस्थान (नीति) को भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) का दर्जा दिया जा रहा है।

राज्यसभा ने विपक्षी सदस्यों की गैर-मौजूदगी में संक्षिप्त चर्चा के बाद इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है।

विधेयक पर चर्चा होने से पहले ही विपक्ष ने मणिपुर मुद्दे पर चर्चा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान की मांग को लेकर सदन से बहिर्गमन कर दिया।

विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से मुंबई स्थित राष्ट्रीय औद्योगिक इंजीनियरिंग संस्थान (नीति) को भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) का दर्जा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय औद्योगिक इंजीनियरिंग संस्थान प्रतिष्ठित संस्थान है जो तकनीकी-प्रबंधन पाठ्यक्रम में विशेषज्ञता रखता है।

उन्होंने कहा कि इस विधेयक के प्रावधान से मुंबई में भी एक आईआईएम होगा। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में प्रस्ताव किया गया है कि राष्टपति ही संस्थान की कुलाध्यक्ष (विजिटर) होंगी।

प्रधान ने कहा कि ऐसे संस्थान अपने पाठ्यक्रम व शिक्षकों के बारे में खुद ही फैसला करेंगे और इस बारे में सरकार कुछ तय नहीं करेगी लेकिन उनसे संवैधानिक जरूरतों को पूरा करने की अपेक्षा है।

विभिन्न केंद्रीय संस्थानों में आरक्षण मुहैया कराने की मौजूदा सरकार की नीति का जिक्र करते हुए प्रधान ने कहा कि संस्थानों में जवाबदेही भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षण उत्कृष्टता के लिए स्वायत्ता दी गई है लेकिन कुछ हद तक जवाबदेही होनी चाहिए, तभी सामाजिक न्याय का सिद्धांत भी पूरा हो सकेगा।

प्रधान ने कहा कि केंद्रीय उच्चतर शिक्षण संस्थानों में 2019 तक आरक्षण तक नहीं था और उनमें सामाजिक न्याय की व्यवस्था नहीं थी और इस विधेयक के जरिए शिक्षण संस्थान सवालों के जवाब देने के लिए बाध्य होंगे।

दुनिया भर में आईआईएम की विश्वसनीयता का जिक्र करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि आईआईएम संस्थान अपना पाठ्यक्रम बनाएं, अपना राजस्व अर्जित करे और सरकार समय समय पर उनकी मदद करती रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने आईआईएम संस्थानों की स्थापना पर 6,000 करोड़ रूपये खर्च किए हैं।

इससे पहले विधेयक पर हुई चर्चा में भारतीय जनता पार्टी के अनिल अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय औद्योगिक इंजीनियरिंग संस्थान को आईआईएम का दर्जा दिया जा रहा है और अब वह अपनी डिग्री दे सकेगा। उन्होंने कहा कि अच्छे प्रबंध संस्थान देश की जरूरत हैं।

बीजू जनता दल के अमर पटनायक ने भी विधेयक का समर्थन किया और कहा कि वैश्विक रैंकिंग में हमारे संस्थान पिछड़ रहे हैं। वाईएसआर कांग्रेस के मस्तान राव वीडा ने कहा कि इस विधेयक से छात्रों के लिए अधिक संख्या में सीट उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने ऐसे संस्थानों को अधिक स्वायत्तता दिए जाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने प्रमुख प्रबंधन संस्थानों की फीस के काफी अधिक होने का मुद्दा भी उठाया।

चर्चा में भाग लेते हुए टीएमसी (एम) सदस्य जी के वासन ने कहा कि देश के शिक्षण संस्थान विश्वस्तरीय हैं लेकिन उनकी वैश्विक रैंकिंग कम है।

वाईएसआर कांग्रेस के वी विजय साई रेड्डी ने विधेयक का समर्थन करते हुए इसे बहुत अच्छा कदम बताया। उन्होंने कहा कि आईआईएम संस्थानों की संख्या में वृद्धि हो रही है लेकिन उनके बजट में उस हिसाब से वृद्धि नहीं हो रही है। उन्होंने मांग की कि देश के सभी 20 आईआईएम संस्थानों के बजटीय आवंटन में वृद्धि की जाए।

उन्होंने कहा कि आईआईएम में बड़ी संख्या में पद खाली हैं जिससे छात्र प्रभावित होते हैं।

अन्नाद्रमुक के एम थंबीदुरई ने कहा कि शिक्षा समवर्ती सूची में है और ऐसे संस्थानों में स्थानीय छात्रों को तरजीह मिलनी चाहिए। ऐसे संस्थानों में जवाबदेही तय किए जाने की मांग की, ऐसे संस्थानों में फीस काफी अधिक है

तेदेपा के कनकमेदला रवींद्र कुमार ने ऐसे संस्थानों में रिक्तियों को भरने और स्थानीय छात्रों को तरजीह देने की मांग की।

इस विधेयक के उद्देश्यों एवं कारण में कहा गया है कि वर्ष 1961 में भारत सरकार ने कलकत्ता और अहमदाबाद में दो भारतीय प्रबंध संस्थान स्थापित करने का निश्चय किया था। इन विशेषज्ञ संस्थानों के माध्यम से भारत में प्रबंध प्रशिक्षण और शिक्षा के क्षेत्र में तेजी लाने की परिकल्पना की गई थी। ऐसे संस्थानों की मांग में वृद्धि होने के कारण बंगलोर (अब बेंगलुरु), लखनऊ, इंदौर और कोझीकोड में भारतीय प्रबंध संस्थान स्थापित किए गए थे।

इसके अनुसार 11वीं योजना में शिलांग, रांची, रोहतक, रायपुर, काशीपुर, तिरूचिरापल्ली और उदयपुर में नए भारतीय प्रबंध संस्थान स्थापित किए गए। वहीं 2015-16 के दौरान अमृतसर, बोधगया, जम्मू, नागपुर, संभलपुर, सिरमौर और विशाखापट्टनम में भारतीय प्रबंध संस्थान स्थापित किए गए।

इसके बाद, अधिनियम के माध्यम से संस्थानों को डिग्रियां प्रदान करने, संस्थानों के शासन को एकसमान बनाने और बोर्ड संचालन के लिए सशक्त बनाया गया है और उन्हें शैक्षिक स्वायत्तता का प्रयोग करने में समर्थ बनाया है।

इसमें कहा गया है कि देश में शीर्षस्थ प्रबंध संस्थानों में से एक होने के बावजूद मुंबई स्थिति उक्त संस्थान डिग्रियां प्रदान करने में असमर्थ है जिससे संस्थान के पक्षकारों खासकर छात्रों की संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

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