नयी दिल्ली, नौ अगस्त संसद ने छत्तीसगढ़ के महरा तथा महारा समुदायों को अनुसूचित जातियों की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव करने वाले संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश (संशोधन) विधेयक-2023 को बुधवार को मंजूरी दे दी।
यह विधेयक छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति सूची के संशोधन के लिए संविधान अनुसूचित जाति आदेश-1950 में संशोधन करता है। विधेयक में छत्तीसगढ़ में महारा और महरा समुदायों को उनके मिलते- जुलते नाम वाले मेहरा, महार और मेहर समुदायों की सूची में शामिल किया गया है।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने उच्च सदन में यह विधेयक पेश किया। लोकसभा ने एक अगस्त को इस विधेयक को पारित किया था। राज्यसभा में इस विधेयक के पारित होने के साथ ही इसे संसद की मंजूरी मिल गई।
राज्यसभा में विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा में बीजू जनता दल की सुलता देव, भाजपा के सुमेर सिंह सोलंकी, तेलुगू देशम पार्टी के कनकमेदला रवींद्र कुमार, वाईएसआर कांग्रेस के सुभाष चंद्र बोस पिल्लई और वी विजय साई रेड्डी और ऑल अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम सदस्य एम थंबीदुरई ने भी भाग लिया।
चर्चा आरंभ होने के ठीक पहले विपक्षी सदस्यों ने मणिपुर हिंसा पर नियम 267 के तहत चर्चा नहीं कराए जाने के विरोध में सदन से बहिर्गमन किया।
विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कुमार ने कहा कि कहा कि विधेयक छत्तीसगढ़ में इन समुदायों के जीवन और स्थितियों में सुधार लाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘इससे इन जातियों को केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलेगा। उन्हें नौकरियों में आरक्षण मिलेगा, शिक्षा संस्थाओं में दाखिले में लाभ मिलेगा, कम ब्याज दर पर कर्ज मिल सकेगा और इसकी सहायता से वे अपने उद्यम शुरु कर सकते हैं।’’
उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्ष में मोदी सरकार ने समाज के वंचित लोगों के कल्याण के कई फैसले किए हैं।
कुमार ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल के दौरान आदिवासी समुदाय का सही मायने में विकास हुआ है जबकि पूर्ववर्ती सरकारों ने उन्हें नजरअंदाज किया।
मंत्री के जवाब के बाद विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र अविनाश
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