विदेश की खबरें | पेरिस जलवायु समझौते के पांच साल पूरे, वैश्विक नेता डिजिटल माध्यम से मिलेंगे

इस समझौते का लक्ष्य वैश्विक तापमान को बढ़ने से रोकना है जिसके मानवजाति के लिए विशानकारी परिणाम हो सकते हैं।

कार्यक्रम की मेजबानी फ्रांस, ब्रिटेन, इटली, चिली और संयुक्त राष्ट्र कर रहे हैं, जिसमें 70 से अधिक देशों के राष्ट्र प्रमुख हिस्सा लेंगे और ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन को कम करने के लिए अपने प्रयासों को तेज़ करने का संकल्प लेंगे।

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ग्रीनहाउस गैस ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से रखी गई प्रतिबद्धताओं ने जलवायु परिवर्तन पर दीर्घकालिक दृष्टिकोण में सुधार किया है।

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मगर एमेजन, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के जंगलों में आग लगना, बांग्लादेश एवं पूर्वी अफ्रीका में बाढ़ आना तथा आर्कटिक में रिकार्ड तापमान पूर्व औद्योगिक काल से तापमान के 1.2 डिग्री सेल्सियस बढ़ने के प्रभाव को रेखांकित करता है।

पेरिस समझौते का लक्ष्य इस सदी के अंत तक ग्लोबल वार्मिंग को दो डिग्री सिल्सियस के अंदर रोकना है, आदर्श रूप से 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा न हो।

अमेरिका, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासन काल में पेरिस समझौते से अलग हो गया था। वह इस कार्यक्रम में शिरकत नहीं करेगा। मगर अमेरिका के कई गवर्नर और कारोबारी नेता जैसे एप्पल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिम कूक, कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।

एपी

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