देश की खबरें | ‘समानांतर आकांक्षाओं’ से उग्रवाद बढ़ा, असम में 8,000 से अधिक लोगों की जान गई: डीजीपी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. असम के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने मंगलवार को कहा कि किसी क्षेत्र विशेष में रहने वाले लोगों की ‘समानांतर आकांक्षाएं’ आमतौर पर उग्रवाद जैसे मुद्दों की ओर ले जाती हैं, जिसने राज्य में साढ़े तीन दशकों के सशस्त्र विद्रोह में 8,000 से अधिक लोगों की जान ले ली है।
अमीनगांव (असम), सात फरवरी असम के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने मंगलवार को कहा कि किसी क्षेत्र विशेष में रहने वाले लोगों की ‘समानांतर आकांक्षाएं’ आमतौर पर उग्रवाद जैसे मुद्दों की ओर ले जाती हैं, जिसने राज्य में साढ़े तीन दशकों के सशस्त्र विद्रोह में 8,000 से अधिक लोगों की जान ले ली है।
यहां ‘वाई 20’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि सरकार राज्य से उग्रवाद की समस्या को हल करने के लिए लोगों की ‘‘समानांतर आकांक्षाओं’’ को लेकर कदम उठाने की रणनीति के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘यह संघर्ष सुलह और मतभेदों के बारे में कभी नहीं था। सरकार की सोच में एक बदलाव आया है वह है लोगों की विभिन्न आकांक्षाओं की पहचान करना।’’
सिंह ने कहा कि उग्रवाद जैसे मुद्दे क्षेत्र के एक विशेष समूह में रहने वाले लोगों की समानांतर आकांक्षाओं या कुछ लोगों की पूरी तरह से अलग आकांक्षाओं के कारण उत्पन्न होते हैं, जो उन महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हथियार उठाते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए समग्र रूप से काम कर रही है। एक बार जब लोगों ने महसूस किया कि वे समाज का हिस्सा हैं, तो असम में शांति आ गई। इसे सुलह कहा जाता है।’’
शीर्ष पुलिस अधिकारी ने कहा कि असम और पूर्वोत्तर के राज्यों की कई देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमाएं हैं जिससे राज्य और क्षेत्र में हथियारों के आसान प्रवाह को बढ़ावा मिला। हालांकि डीजीपी ने कहा कि शांति पूरी तरह से असम में वापस आ गई है, जिसके कारण राज्य के अधिकांश हिस्सों से सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (आफस्पा) को वापस ले लिया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘आफस्पा केवल असम के लगभग 27-28 फीसदी हिस्से पर लागू है। ऊपरी असम के कुछ जिलों को छोड़कर असम से उग्रवाद खत्म हो गया है।’’
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