मुंबई, सात सितंबर महाराष्ट्र सरकार ने बम्बई उच्च न्यायालय को बताया कि पंढरपुर मंदिर अधिनियम विशेष परिस्थितियों के कारण विट्ठल और रुक्मिणी मंदिरों के हितों की रक्षा करने और पुजारी वर्गों के लोभ से भक्तों को बचाने के लिए अधिनियमित किया गया था।
बम्बई उच्च न्यायालय ने पंढरपुर मंदिर अधिनियम के प्रावधानों को चुनौती देने संबंधी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सुब्रमण्यम स्वामी और जगदीश शेट्टी द्वारा दायर एक याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा था।
सरकार ने भाजपा नेता स्वामी और शेट्टी द्वारा दायर याचिका के जवाब में 24 अगस्त को दायर अपने हलफनामे में कहा कि जैसा कि याचिका में आरोप लगाया गया है, यह भक्तों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं है।
महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के पंढरपुर शहर में भगवान विट्ठल और देवी रुक्मिणी के मंदिर हैं। लाखों श्रद्धालु पंढरपुर की पैदल वार्षिक तीर्थयात्रा करते हैं, जो आषाढ़ी एकादशी के दिन समाप्त होती है।
हलफनामे में कहा गया है, ‘‘पंढरपुर मंदिरों के संबंध में विशेष परिस्थितियां प्रचलित थीं, जिससे मंदिरों और इसकी संपत्तियों और तीर्थयात्रियों के हितों की रक्षा के लिए सरकार की ओर से कार्रवाई की आवश्यकता हुई।’’
इसमें कहा गया है कि पुजारी वर्ग द्वारा मंदिरों के कुप्रबंधन की शिकायतों के बाद यह अधिनियम बनाया गया था।
राज्य कानून और न्यायपालिका विभाग के उप सचिव द्वारा दायर हलफनामे में इन आरोपों से इनकार किया गया कि राज्य सरकार ने मनमाने ढंग से पंढरपुर मंदिरों पर कब्जा कर लिया है। हलफनामे के अनुसार, अधिनियम का घोषित उद्देश्य मंदिरों का बेहतर प्रशासन करना था।
इसमें कहा गया है कि यह अधिनियम किसी भी तरह से भक्तों या तीर्थयात्रियों के अपने धर्म को मानने और पूजा करने के अधिकारों को कम नहीं करता है, बल्कि इसे आम जनता के हित में वैध रूप से पेश किया गया था।
याचिका के अनुसार, राज्य सरकार ने पंढरपुर मंदिर अधिनियम, 1973 के माध्यम से, राज्य के सोलापुर जिले के पंढरपुर में भगवान विट्ठल और रुक्मिणी के मंदिरों के शासन और प्रशासन के लिए पुरोहित और पुजारी वर्ग के सभी वंशानुगत अधिकारों और विशेषाधिकारों को समाप्त कर दिया था।
याचिका में कहा गया है कि कानून ने राज्य सरकार को उसके प्रशासन और धन प्रबंधन को नियंत्रित करने में सक्षम बनाया है।
इस साल फरवरी में दायर याचिका में स्वामी और शेट्टी ने दावा किया था कि महाराष्ट्र सरकार ने पंढरपुर शहर के मंदिरों का प्रशासन मनमाने तरीके से अपने हाथ में ले लिया है।
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की खंडपीठ इस मामले पर 13 सितंबर को सुनवाई कर सकती है।
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