विदेश की खबरें | महामारी ने भारत को खुद को मजबूत करने और वैश्विक मंच पर आगे आने के लिए प्रेरित किया: भारतीय राजदूत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. चीन में भारत के राजदूत विक्रम मिस्री ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी ने भारत को खुद को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया है और इस महामारी ने दिखाया है कि भारत व्यापक क्षमताओं के साथ न केवल अपनी मदद करेगा बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भलाई के लिए काम करेगा।

बीजिंग, पांच जनवरी चीन में भारत के राजदूत विक्रम मिस्री ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी ने भारत को खुद को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया है और इस महामारी ने दिखाया है कि भारत व्यापक क्षमताओं के साथ न केवल अपनी मदद करेगा बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भलाई के लिए काम करेगा।

हांगकांग से प्रकाशित अखबार ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ में एक आलेख में मिस्री ने लिखा कि महामारी के ‘विनाशकारी प्रभाव’ को आंकना मुश्किल था और इसका असर बहुत अधिक रहा।

भारतीय राजदूत ने कहा, ‘‘लेकिन इस क्रम में सबसे अहम बात बढ़ता अंतरराष्ट्रीय सहयोग है, खासतौर पर जब हमारा आपसी जुड़ाव निरंतर बढ़ रहा है। इसी अनुरूप उभरती बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था में भारत अपने तात्कालिक पड़ोस को सर्वाधिक ध्यान देता रहेगा, जहां लेन-देन रहित व्यवहार पर आधारित ‘पड़ोस प्रथम’ की उसकी नीति साझा गतिविधियों का आधार तैयार कर रही है।’’

मिस्री ने सोमवार को प्रकाशित लेख में लिखा, ‘‘उसी समय हमारा व्यापक पड़ोस भी हमारे इतिहास और धरोहर का अभिन्न हिस्सा रहा है और एक्ट ईस्ट नीति एवं हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘सागर (क्षेत्र के सभी देशों के लिए सुरक्षा और प्रगति)’ दृष्टि के माध्यम से हमारी सहभागिता जाहिर हुई है जिसमें हमारे समुद्री पड़ोसी देशों के साथ साझेदारी का प्रारूप है।’’

उन्होंने कहा कि दुनिया को अधिक विश्वस्त और सक्षम सहयोगी चाहिए और भारत मानता है कि वह इस भूमिका को निभा सकता है।

मिस्री ने लिखा, ‘‘महामारी ने दिखाया कि भारत व्यापक क्षमताओं के साथ न केवल अपनी मदद करेगा बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भलाई का वाहक बनेगा। आत्मनिर्भर भारत आत्म-केंद्रित भारत नहीं है।’’

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य के रूप में एक जनवरी से शुरू हुए भारत के दो वर्ष के कार्यकाल के संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘‘इस बात से सहमत हूं कि बहुध्रुवीय दुनिया को आज अधिक बहुलवाद की जरूरत है और हम संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय निकायों को समकालीन वास्तविकताओं के साथ तालमेल के साथ अधिक प्रतिनिधित्व वाला बनाने के प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।’’

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