देश की खबरें | पीजीआईएमईआर में पहली बार एक मरीज में अग्नाशय और गुर्दे का एक ही समय पर प्रतिरोपण किया गया

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चंडीगढ़, 31 जनवरी चंडीगढ़ स्थित स्नात्कोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) में पहली बार अपनी किस्म के अनोखे एवं जटिल आपरेशन में एक मरीज में अग्नाशय (पैंक्रियाज) और गुर्दे (किडनी) का एक ही समय पर प्रतिरोपण किया गया।

मरीज में एक मृत व्यक्ति का अग्नाशय प्रतिरोपित किया गया, जबकि गुर्दा उसकी (मरीज की) बहन ने दान किया था।

सोमवार को पीजीआईएमईआर ने बताया कि 21 वर्षीय कुंदन बैठा (मृतक) का अंगदान करने वाले उसके परिवार के इस उदार रुख ने चार लोगों की जान बचाई।

संस्थान ने कहा, ‘‘एक और उपलब्धि हासिल करते हुए स्नात्कोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान ने पहली बार अग्नाशय और गुर्दा प्रतिरोपण साथ-साथ किया, जहां अग्नाशय अंगदान करने वाले एक मृतक के शरीर से हासिल किया गया, जबकि गुर्दा मरीज की बहन ने दान किया था।’’

बयान के मुताबिक, बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले का निवासी कुंदन बैठा 22 जनवरी को किसी कार्य से बाहर गया था, तभी उसकी मोटरसाइकिल फिसल गई और वह सड़क पर गिर गया। दुर्घटना में उसके सिर में गंभीर चोट आई थी।

कुंदन को नाजुक हालत में 23 जनवरी को संस्थान में लाया गया था। हालांकि,29 जनवरी को पीजीआईएमईआर की प्रमाणन समिति ने यह घोषित किया कि उसके मस्तिष्क ने काम करना बंद कर दिया है।

बयान में कहा गया है, ‘‘लेकिन दुख की इस घड़ी में उसके पिता नरसिंह बैठा ने असाधारण साहस का परिचय देते हुए अपने मृत बेटे के अंगदान करने की सहमति दी।’’

परिवार की सहमति के बाद कुंदन के हृदय, लीवर, गुर्दे और अग्नाशय को प्रतिरोपण के लिए निकाल लिया गया।

एक ही समय पर किये गये अग्नाशय और गुर्दा प्रतिरोपणों के बारे में नेफ्रोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. एच एस कोहली ने कहा कि एक ही समय पर दो अंगों का प्रतिरोपण करना एक बड़ी चुनौती थी। उन्होंने कहा, ‘‘टीम ने अथक परिश्रम से आखिरकार इसे सफल बना दिया।’’

रेनल ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. आशीष शर्मा ने कहा कि जिस व्यक्ति में ये अंग प्रतिरोपित किये गये वह पिछले 21 वर्षों से ‘टाइप 1’ मधुमेह से ग्रसित था। उन्होंने बताया कि मरीज की बहन उसे किडनी दान करने की इच्छुक थी, लेकिन वह अपना अग्नाशय नहीं दे सकती थी।

ऑपरेशन करीब 12 घंटे तक चला और इसमें विभिन्न विभागों के करीब 30 चिकित्साकर्मियों ने योगदान दिया। संयुक्त प्रतिरोपण ऑपरेशन किसी जटिलता के बगैर सफल रहा।

पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने अंगदान करने वाले व्यक्ति के परिवार की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘‘कुंदन बैठा की तरह अंगदान करने वाले व्यक्ति के परिवार को एक अलग ही तरह का सम्मान मिलता है।’’

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