जरुरी जानकारी | जीडीपी गणना के लिए सहकारी समितियों का पैन आंकड़ा महत्वपूर्णः सहकारिता सचिव

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नयी दिल्ली/ शिलांग, 11 अप्रैल केंद्रीय सहकारिता सचिव आशीष कुमार भूटानी ने शुक्रवार को राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की गणना में सहकारिता क्षेत्र का अधिक सटीक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए सभी सहकारी समितियों से स्थायी खाता संख्या (पैन) का आंकड़ा जुटाने का आह्वान किया।

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, भूटानी ने शिलांग में आयोजित दो-दिवसीय समीक्षा बैठक में यह बात कही।

उन्होंने कहा, "मंत्रालय 'सहकार से समृद्धि' के संकल्प को साकार करने के लिए मजबूत अंतर-राज्यीय सहयोग के साथ सहकारी-नेतृत्व वाली आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।"

सहकारिता सचिव ने डेयरी क्षेत्र के जरिये ग्रामीण विकास के लिए एक प्रमुख पहल के रूप में ‘दूसरी श्वेत क्रांति’ का भी जिक्र किया। उन्होंने गुजरात और महाराष्ट्र को महिला सशक्तीकरण और बेहतर बाल-पोषण के लिए सफल मॉडल बताया।

उन्होंने कहा, "हम असम, झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों को डेयरी अवसंरचना के विस्तार में मदद करने के लिए अमूल और एनडीडीबी जैसी संस्थाओं के साथ साझेदारी कर रहे हैं।"

सचिव ने कहा कि पशुपालन की आर्थिक क्षमता अब पारंपरिक फसल की खेती से कहीं अधिक है।

भूटानी ने देश के पहले त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए हाल ही में पारित कानून को 'ऐतिहासिक' बताते हुए कहा कि इससे राज्यों में सहकारी शिक्षा का मानकीकरण होगा और 250 से अधिक मौजूदा सहकारी संस्थाओं को लाभ होगा।

बैठक में राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, सहकारी महासंघों, वित्तीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया।

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