नयी दिल्ली, 25 जुलाई भारत में मलेशिया से कच्चे पाम तेल का निर्यात थोड़ी सुस्सी के बाद मई और जून में फिर से बढ़कर 2.5 लाख टन प्रति माह हो गया। मलेशियन पाम ऑयल काउंसिल (एमपीओसी) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी बेलविंदर स्रोन ने यह जानकारी दी।
इसके साथ ही भारत में मलेशिया की बाजार हिस्सेदारी 2023 के 30 प्रतिशत से बढ़कर 2025 की पहली छमाही में 35 प्रतिशत हो जाएगी।
स्रोन ने 'आईवीपीए ग्लोबल राउंड' टेबल के चौथे संस्करण में कहा कि अक्टूबर 2024 में मांग चरम पर पहुंचने के बाद एक बार फिर निर्यात में सुधार हुआ है।
उन्होंने कहा कि दिवाली से पहले मूल्य प्रतिस्पर्धा और त्योहारी स्टॉक फिर से तैयार करने के कारण तीसरी तिमाही में भी सकारात्मक रुझान जारी रहने की उम्मीद है।
स्रोन ने बृहस्पतिवार को कहा, ''पिछले पांच वर्षों में, भारत में मलेशिया का कच्चे पाम तेल का निर्यात औसतन 25 लाख टन सालाना पर स्थिर रहा है।''
सीईओ ने कहा, ''हमें उम्मीद है कि यह वृद्धि दर साल के अंत तक जारी रहेगी।''
एक बयान में कहा गया कि गोलमेज सम्मेलन के दौरान, एमपीओसी ने मलेशियाई पाम तेल के पोषण संबंधी और टिकाऊपन संबंधी प्रमाणों को प्रोत्साहन देने के लिए भारतीय वनस्पति तेल उत्पादक संघ (आईवीपीए) के साथ एक सहयोग को औपचारिक रूप दिया।
यह साझेदारी मार्च 2025 में ऑयल टेक्नोलॉजिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ओटीएआई) के साथ हुए एक समझौते के बाद हुई है।
वैश्विक उत्पादन में 24 प्रतिशत हिस्सेदारी और 193.4 लाख टन उत्पादन के साथ मलेशिया दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पाम तेल उत्पादक है और वह भारत का एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।
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