विदेश की खबरें | पाकिस्तान की शीर्ष अदालत मौत की सजा के खिलाफ दिवंगत तानाशाह मुशर्रफ की याचिका पर सुनवाई करेगी
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

इस्लामाबाद, छह नवंबर पाकिस्तान की शीर्ष अदालत पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ की दोषसिद्धि से संबंधित विभिन्न अपील पर शुक्रवार से सुनवाई शुरू करेगी। इनमें मुशर्रफ की एक अपील भी शामिल है जिसमें देशद्रोह के मामले में एक विशेष अदालत द्वारा उन्हें सुनाई गई मौत की सजा को पलटने का आग्रह किया गया है।

न्यायमूर्ति वकार अहमद सेठ, न्यायमूर्ति नज़र अकबर और न्यायमूर्ति शाहिद करीम की तीन न्यायाधीशों की विशेष अदालत ने 17 दिसंबर, 2019 को 2-1 के खंडित फैसले में संविधान के उल्लंघन के लिए अनुच्छेद 6 के तहत देशद्रोह का दोषी पाते हुए मुशर्रफ को उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी।

इस फैसले ने देश की सेना को नाराज कर दिया था, जिसने 1947 के बाद से अधिकांश समय देश में शासन किया है। बाद में, लाहौर उच्च न्यायालय ने मौत की सज़ा को रद्द कर दिया था।

दिलचस्प बात यह है कि लाहौर उच्च न्यायालय ने 9 जनवरी, 2020 को विशेष अदालत पीठ के गठन को इस आधार पर "असंवैधानिक" घोषित कर दिया था कि इसका गठन कैबिनेट की मंजूरी के बिना किया गया था।

बाद में, सिंध उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने 13 जनवरी, 2020 को विशेष अदालत के फैसले को असंवैधानिक घोषित करने के लाहौर उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी और इसे रद्द किए जाने की मांग की।

याचिका में तर्क दिया गया कि उच्च न्यायालय का फैसला शीर्ष अदालतों द्वारा निर्धारित कानून के साथ-साथ 2019 लाहौर उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित आदेश के विपरीत था। इसने शीर्ष अदालत से संविधान को नष्ट करने के लिए विशेष अदालत द्वारा मुशर्रफ को सुनाई गई सजा को बहाल करने का अनुरोध किया था।

वर्ष 1999 के करगिल युद्ध के सूत्रधार मुशर्रफ की फरवरी 2023 में लंबी बीमारी के चलते दुबई में मौत हो गई थी।

डॉन अखबार की खबर के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश काजी फ़ैज़ ईसा, न्यायमूर्ति सैयद मंसूर अली शाह, न्यायमूर्ति अमीनुद दीन खान और न्यायमूर्ति अतहर मिनल्ला की चार सदस्यीय पीठ मामले में सुनवाई करेगी।

मुशर्रफ ने अपने वकील सलमान सफदर के माध्यम से अपील दायर की थी कि दोषसिद्धि को निरस्त कर दिया जाए क्योंकि मुकदमा संविधान सम्मत नहीं था।

अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, अपील में कहा गया कि पूर्व राष्ट्रपति पर ‘संवैधानिक अपराध’ के लिए पूरी तरह ‘असंवैधानिक तरीके’ से मुकदमा चलाया गया।

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