विदेश की खबरें | पाकिस्तान की आतंकवाद रोधी अदालत ने इमरान खान को तीन मामलों में गिरफ्तारी पूर्व जमानत दी

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श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

(एम जुल्करनैन)

लाहौर, 19 मई पाकिस्तान की एक आतंकवाद रोधी अदालत (एटीसी) ने नौ मई को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद हुई हिंसा को लेकर उनके खिलाफ दर्ज तीन मामलों में उन्हें शुक्रवार को गिरफ्तारी पूर्व जमानत दे दी।

इमरान अपने वाहन को लाहौर एटीसी परिसर में दाखिल होने की इजाजत मिलने के बाद शुक्रवार को अदालत के समक्ष पेश हुए।

लाहौर एटीसी ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी (पीटीआई) के अध्यक्ष इमरान (70) को आतंकवाद से जुड़े तीन मामलों में दो जून तक गिरफ्तारी से राहत प्रदान करते हुए जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया।

इस पर, इमरान ने अदालत को आश्वासन दिया कि वह जांच में सहयोग करेंगे।

पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ दर्ज इन तीन मामलों में से एक लाहौर में जिन्ना हाउस पर हुए हमले से संबंधित है।

एटीसी कक्ष में संवाददाताओं से मुखातिब इमरान ने कहा कि हर कोई सैन्य प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों की निंदा कर रहा है। उन्होंने इन हमलों की जांच कराने की मांग भी की।

यह पूछे जाने पर कि उन्होंने लाहौर में शीर्ष सैन्य अधिकारी के आवास पर हुए हमले की निंदा करते हुए अभी तक कोई बयान क्यों नहीं जारी किया है? इमरान ने कहा, “मैं पहले ही ऐसा कर चुका हूं... लाहौर में जिन्ना हाउस पर हमले की निंदा कौन नहीं कर रहा है? मुझे पाकिस्तान के किसी एक शख्स का नाम बताइए, जो ऐसा नहीं कर रहा है।”

पूर्व प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के नेतृत्व वाली सरकार उनकी पार्टी पीटीआई को सेना के खिलाफ पेश करके उसे मुख्यधारा की राजनीति से हटाना चाहती है।

इमरान ने कहा कि उन्होंने पिछले 35 वर्षों में इस तरह की ‘कार्रवाई’ कभी नहीं देखी।

उन्होंने आरोप लगाया, “ऐसा लगता है कि जैसे सभी नागरिक स्वतंत्रताएं और सभी मौलिक अधिकार खत्म हो गए हैं। अब केवल अदालतें मानवाधिकारों की रक्षा कर रही हैं।”

‘द डॉन’ अखबार में प्रकाशित खबर के मुताबिक, पीटीआई प्रमुख ने जोर देकर कहा कि वह ‘आखिरी गेंद तक’ लड़ना जारी रखेंगे।

अर्धसैनिक बल पाकिस्तान रेंजर्स द्वारा नौ मई को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय परिसर से इमरान की गिरफ्तारी के बाद देश में विरोध-प्रदर्शन भड़क गए थे।

पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार प्रदर्शनकारियों ने रावलपिंडी में सेना मुख्यालाय पर धावा बोल दिया था और लाहौर में एक कोर कमांडर के आवास को आग के हवाले कर दिया था।

पाकिस्तान पुलिस का कहना है कि हिंसक झड़पों में दस लोगों की मौत हुई, जबकि इमरान की पार्टी का दावा है कि सुरक्षा बलों द्वारा की गई गोलीबारी में उसके 40 कार्यकर्ता मारे गए।

सोमवार को पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व ने नागरिक और सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला करने वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तान सेना अधिनियम और सरकारी गोपनीयता अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने की बात कही थी।

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