विदेश की खबरें | पाकिस्तानी अदालत ने भ्रष्टाचार मामलों में जरदारी को बरी करने के खिलाफ अपीलों को खारिज किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) ने पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ दो दशक से अधिक समय पहले दर्ज भ्रष्टाचार के कुछ मामलों में उन्हें बरी करने के खिलाफ मुल्क की शीर्ष भ्रष्टाचार रोधी संस्था की अपीलों को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया।
इस्लामाबाद, 20 अक्टूबर इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) ने पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ दो दशक से अधिक समय पहले दर्ज भ्रष्टाचार के कुछ मामलों में उन्हें बरी करने के खिलाफ मुल्क की शीर्ष भ्रष्टाचार रोधी संस्था की अपीलों को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया।
राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) ने 1990 के दशक में जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के ये मामले दर्ज किए थे। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता को बाद में 2014 और 2015 में बरी कर दिया गया। हालांकि, एनएबी ने इस फैसले को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी।
एनएबी ने कोई सबूत पेश करने में नाकाम होने के बाद बुधवार को एक अर्जी दायर कर कहा कि वह इन मामलों को आगे बढ़ाना नहीं चाहता है क्योंकि उपलब्ध साक्ष्य फोटोकॉपी पर आधारित हैं।
भ्रष्टाचार रोधी संस्था ने अदालत में यह भी कहा कि वह अपनी अपीलों को वापस लेना चाहती है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अतहर मिनाल्लाह ने याचिकाओं पर सुनवाई के बाद कहा कि मामला सुनवाई योग्य नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम इन अपीलों को वापस लेने के एनएबी के अनुरोधों को स्वीकार कर रहे हैं और सुनवाई योग्य न होने के आधार पर उन्हें खारिज कर रहे हैं।’’
इस्लामाबाद स्थित जवाबदेही अदालत ने जरदारी को एसजीसी तथा कोटेक्ना भ्रष्टाचार मामलों में वित्तीय फायदों के लिए आधिकारिक पद का दुरुपयोग करने के आरोपों से 24 नवंबर 2015 को बरी कर दिया था।
उन्हें एआरवाई गोल्ड के मालिक हाजी अब्दुल्ला को बिना कर दिए सोने तथा चांदी के आयात करने की अनुमति देने के एक अन्य मामले में भी 2014 में बरी कर दिया गया था। इसके साथ ही उरसुस मामले में भी उन्हें बरी कर दिया गया था, जिसमें उन पर रूसी तथा पोलैंड के ट्रैक्टर खरीदने में वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे थे।
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