विदेश की खबरें | सांसदों के विरोध के बाद पाकिस्तान सीनेट ने हिंसक चरमपंथ को रोकने वाला विधेयक वापस लिया

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श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

इस्लामाबाद, 30 जुलाई पाकिस्तान सीनेट के सभापति सादिक संजरानी ने सत्तारूढ़ गठबंधन सहित विभिन्न दलों के सांसदों के कड़े विरोध के बाद देश में हिंसक चरमपंथ को नियंत्रण करने से जुड़ा विधेयक रविवार को वापस ले लिया।

मीडिया में रविवार को आयी खबरों के अनुसार, गृह मंत्री राणा सनाउल्ला की ओर से कानून एवं न्याय राज्य मंत्री शहादत अवान द्वारा सदन में रखे गए ‘हिंसक चरमपंथ रोधी विधेयक, 2023’ को सांसदों के विरोध के बाद सभापति ने वापस ले लिया।

विधेयक में कहा गया कि जो लोग दूसरों को शक्ति प्रदर्शन करने या ताकत का इस्तेमाल करने को कहते हैं, चरमपंथी सामग्री का प्रचार या प्रकाशन करते हैं, कट्टरपंथ को बढ़ावा देने के लिए या लोगों के विचारों को भ्रमित करने के लिए मीडिया का इस्तेमाल करते हैं और सम्प्रदायों के बीच दुश्मनी पैदा कर रहे हैं, वे हिंसक चरमपंथ के दोषी होंगे।

इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के सांसद मोहम्मद हुमायूं मोहम्मद ने कहा कि उन्हें नहीं पता है कि विधेयक रविवार को सदन में क्यों रखा गया। उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या पाकिस्तान में कोई आपात स्थिति है कि हम रविवार को, सार्वजनिक अवकाश के दिन यहां आए और यह कर रहे हैं?’’

‘डॉन’ न्यूज की खबर के अनुसार, मोहम्मद ने कहा कि अगर ऐसे विधेयक को समुचित प्रक्रिया का पालन करके लाया गया होता तो उसकी कुछ महत्ता होती। उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम कोई काम जल्दीबाजी में सिर्फ इसलिए करते हैं क्योंकि सरकार को लगता है कि बहुत कम समय बचा है तो, जल्दी का काम शैतान का होता है।’’

रविवार को संसद सत्र आहूत करने का बचाव करते हुए पर्यावरण मंत्री शेरी रहमान ने कहा कि पहले भी शनिवार-रविवार को सत्र बुलाए गए हैं।

एजेंडा में मौजूद विधेयकों को संबंधित समितियों को नहीं भेजे जाने के संबंध में अन्य सांसदों के सवालों पर रहमान ने कहा, ‘‘शायद उन्हें नहीं पता है कि जब नेशनल एसेंबली अपना कार्यकाल पूरा कर लेती है तो, वहां पटल पर रखे गए विधेयक...नियम कहता है कि जिस दिन कार्यकाल समाप्त होता है वहां रखे गए विधेयक निष्प्रभावी हो जाते हैं।’’

शेरी ने कहा कि सीनेट एसेंबली का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी विधेयकों में संशोधन का प्रस्ताव रख सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘किसी को जल्दीबाजी में लाया गया कानून पसंद नहीं है।’’

सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएल-एन) के सीनेटर इरफान सिद्दीकी ने कहा कि सत्तारूढ़ दल के सदस्य होने के नाते संभवत: यह अनिवार्यता थी कि वे विधेयक के पक्ष में मतदान करेंगे। उन्होंने कहा कि वह ऐसा करेंगे भी। उन्होंने यह भी कहा कि आज के एजेंडा में शामिल कई विधेयक आवश्यक हैं।

हिंसक चरमपंथ रोधी विधेयक के संबंध में उन्होंने कहा कि इसमें विस्तृत पहलुओं पर ध्यान दिया गया है और बताया कि विधेयक में 33 प्रावधान और 100 उप-प्रावधान हैं जो नेताओं से लेकर सामान्य जनता सभी पर लागू होंगे। सिद्दीकी ने इंगित किया कि यह विधेयक नेशनल एसेंबली से नहीं आया था और यह सीधे सीनेट में रखा गया है।

सीनेट के सभापति संजरानी ने पूछा ‘‘इसका विरोध किया जाता है?’’ इसपर सीनेटर ने कहा, हां इसका विरोध किया जाता है। बलुचिस्तान आवामी पार्टी से ताल्लुक रखने वाले संजरानी ने पूछा, ‘‘मैं इसे समिति के पास भेजूं या पारित कराने के लिए रखूं?’’

इस्लामिक पार्टी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल के सीनेटर कामरान मुर्तजा ने कहा कि ऐसे किसी भी विधेयक के लिए सहयोगी दलों को विश्वास में लेने की आवश्यकता है।

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