इस्लामाबाद, 25 अप्रैल पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने भारतीय छात्रों को पाकिस्तान में अध्ययन नहीं करने के यूजीसी और एआईसीटीई के संयुक्त परामर्श की निंदा करते हुए सोमवार को इस विषय पर भारत से स्पष्टीकरण मांगा है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने शुक्रवार को संयुक्त परामर्श में भारतीय छात्रों से पाकिस्तान के किसी कॉलेज या शिक्षण संस्थान में प्रवेश नहीं लेने की अपील की थी।
परामर्श में कहा गया कि पाकिस्तान के किसी डिग्री कॉलेज या शिक्षण संस्थान में प्रवेश चाह रहे किसी भारतीय नागरिक या प्रवासी भारतीय नागरिक को पाकिस्तान में प्राप्त ऐसी शैक्षणिक योग्यता (किसी भी विषय में) के आधार पर भारत में रोजगार मांगने या उच्च शिक्षा प्राप्त करने की पात्रता नहीं होगी।
विदेश कार्यालय (एफओ) ने सोमवार को कहा, ‘‘पाकिस्तान यूजीसी और एआईसीटीई द्वारा जारी तथाकथित ‘सार्वजनिक नोटिस’ की कड़ी भर्त्सना करता है जिसमें छात्रों को पाकिस्तान में उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं करने की सलाह दी गयी है और ऐसा करने पर रोजगार नहीं मिलने की चेतावनी दी गयी है।’’
उसने कहा, ‘‘अफसोस की बात है कि पाकिस्तान को लेकर लाइलाज सनक की वजह से भारत सरकार निश्चित रूप से छात्रों पर अपनी पसंद की गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्राप्त करने से रोकने के लिए दबाव डाल रही है।’’
एफओ ने कहा, ‘‘हमने कथित सार्वजनिक नोटिस के संदर्भ में भारत की सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।’’
उसने कहा कि भारत के इस ‘खुल्लम खुल्ला भेदभाव वाले’ कदम के जवाब में पाकिस्तान उचित कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
इस बीच, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस सार्वजनिक नोटिस से कितने भारतीय छात्र, विशेष रूप से कश्मीरी छात्र प्रभावित होंगे।
पाकिस्तान के उच्चायोग के एक अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं होने की शर्त पर ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘कश्मीर के छात्र यहां कुछ विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे हो सकते हैं, लेकिन हमारे पास कोई ठोस आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY